सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के छिछड़ियाधार में हुए दर्दनाक हादसे ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। एक साथ एक मां और उसकी बेटी की चिता जली, वहीं सात माह के गर्भ में पल रही अजन्मी बच्ची को भी दुनिया देखने से पहले ही दफन कर दिया गया। इस हादसे ने डेढ़ साल की मासूम ईरा से उसकी मां की ममता हमेशा के लिए छीन ली। गुरुवार को जब पूजा, उसकी अजन्मी बच्ची और निर्मला को अंतिम विदाई दी गई, तो पूरे गांव में मातम छा गया।

पूजा के पति का रो-रोकर बुरा हाल

बता दें कि गुरुवार को पूजा, उसकी अजन्मी बच्ची और निर्मला का अंतिम संस्कार किया गया। पत्नी और होने वाली बेटी को खोने के बाद पूजा के पति अमित राणा का रो-रोकर बुरा हाल है। एक तरफ परिवार के दो सदस्यों को खोने का दुख है, वहीं अब उनकी डेढ़ साल की बेटी ईरा की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई है।

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अलग-अलग जगहों पर हुआ अंतिम संस्कार

पूजा का अंतिम संस्कार गुरुवार को भवाई में किया गया। उसके गर्भ में पल रही सात माह की बच्ची को भी अंतिम विदाई देकर दफनाया गया। वहीं निर्मला का अंतिम संस्कार किट्टा लालचेता में किया गया। तीनों को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। इस दौरान हर किसी की आंखें नम थीं।

अचानक भरभराकर गिरा तीन मंजिला मकान

हादसा बीते बुधवार दोपहर करीब 12:05 बजे हुआ। छिछड़ियाधार निवासी भीम सिंह का तीन मंजिला मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान गिरने से भीम सिंह की पत्नी निर्मला और उनकी विवाहित बेटी पूजा मलबे में दब गईं और दोनों की मौत हो गई। पूजा उस समय सात माह की गर्भवती थी।

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हादसे की खबर मिलते ही मदद के लिए दौड़े ग्रामीण

मकान गिरने की खबर मिलते ही गांव के लोग बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच गए। पास के होटल में मौजूद युवाओं और अन्य ग्रामीणों ने तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। करीब 15 मिनट के अंदर सनियों, दीदग और जेलग खनोटियों से भी कई ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और राहत-बचाव में जुट गए।

मलबे से सामान निकालकर सुरक्षित पहुंचाया

ग्रामीणों ने सिर्फ लोगों को मलबे से निकालने में ही मदद नहीं की, बल्कि हादसे में टूटे मकान का सामान भी बाहर निकाला। सामान को पुराने मकान में सुरक्षित पहुंचाया गया। टूटी अलमारी से मिले जेवर और नकदी को पुलिस और पंचायत की मौजूदगी में परिवार को सौंप दिया गया।

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दुख की घड़ी में ग्रामीणों ने दिया परिवार का साथ

इस हादसे ने दो परिवारों को ऐसा दुख दिया है, जिसे शायद कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। एक तरफ परिवार ने अपने अपनों को खो दिया, वहीं डेढ़ साल की मासूम ईरा ने अपनी मां को हमेशा के लिए खो दिया। ऐसे मुश्किल समय में दीदग पंचायत के ग्रामीणों ने जिस तरह एकजुट होकर पीड़ित परिवारों की मदद की, वह इंसानियत और भाईचारे की मिसाल है।