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January 21, 2026

हिमाचल : वर्षों बाद खत्म हुई देव शक्तियों की तकरार, महामिलन के बाद होगी बारिश-बर्फबारी

भगवान विष्णु का रूप माने जाते हैं बड़े देव

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Bada Dev Vishnu Matloda Chunjwala Mahadev Devbhoomi Himachal Devta Mahamilan Mandi

मंडी। देवभूमि हिमाचल प्रदेश की आस्था, परंपरा और देव संस्कृति में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मंडी जनपद के अधिष्ठाता देवताओं में शामिल बड़े देव विष्णु मतलोड़ा और देव चुंजवाला महादेव के देवलुओं के बीच चली आ रही 25 वर्षों पुरानी तकरार आखिरकार समाप्त हो गई है।

25 साल बाद खत्म हुई तकरार

वर्षों से चला आ रहा यह धुर विवाद अब आपसी भाईचारे, समझदारी और देव आज्ञा के आगे नतमस्तक हो गया है। शनिवार, 24 जनवरी को मंडी जिले के बालीचौकी क्षेत्र की माणी हार में दोनों महाशक्तियों का ऐतिहासिक महामिलन होने जा रहा है। इस पावन अवसर के साक्षी हजारों श्रद्धालु बनेंगे। घाटी में इस मिलन को लेकर खासा उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।

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दो माहशक्तियों का होगा मिलन

हाल ही में बागाचनोगी के धरबाड़थाच में देव विष्णु मतलोड़ा और देव चुंजवाला महादेव की कमेटियों की अहम बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में दोनों पक्षों ने वर्षों पुरानी तकरार को समाप्त करने का फैसला लिया और आपसी मतभेद भुलाकर भाईचारे का संदेश दिया।

 

देव समाज में इसे एक बड़ा और सकारात्मक निर्णय माना जा रहा है, क्योंकि यह विवाद केवल दो हारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे क्षेत्र की धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा था।

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सात हारियों में वर्षों बाद होगा देव मिलन

पिछले 25 वर्षों से देवताओं को बैठाने को लेकर चले आ रहे धुर विवाद के कारण सात हारियों में देव मिलन नहीं हो पा रहा था। यही वजह रही कि परंपरागत रूप से होने वाले कई धार्मिक अनुष्ठान अधूरे रह गए।

 

हालांकि, बीते वर्ष अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान दोनों देवताओं का मिलन हुआ था, जिसने देव समाज में नई उम्मीद जगाई थी। अब वर्षों बाद माणी हार में सात हारियों के अंतर्गत होने वाला यह महामिलन ऐतिहासिक माना जा रहा है।

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दोनों देवताओं का रिश्ता भाई-भाई

घाटी में दोनों देवताओं का रिश्ता भाई-भाई के रूप में माना जाता है। इसी परंपरा को फिर से जीवंत करने के लिए देव चुंजवाला महादेव की माणी हार में तैयारियां जोरों पर हैं। बताया जा रहा है कि बड़े देव विष्णु मतलोड़ा के साथ 14 हारियों के कारकारिंदे भी माणी पहुंचेंगे, जिनका पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया जाएगा।

“पहले देव मिलन, फिर बरसेंगे बादल”

बड़े देव विष्णु मतलोड़ा के कारदार बीरबल ठाकुर के अनुसार, मंडी जिला ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई हिस्से पिछले तीन महीनों से सूखे की मार झेल रहे हैं। बारिश और बर्फबारी न होने से किसान, बागवान और आम लोग चिंतित हैं।

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पहले होगा मिलन, फिर बरसेंगे मेघ

जब ग्रामीणों ने देवता से बारिश न होने का कारण पूछा, तो देववाणी के माध्यम से बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा ने स्पष्ट संकेत दिया कि पहले देव चुंजवाला महादेव से देव मिलन होगा, उसके बाद ही वर्षा होगी।

किसानों-बागवानों के चेहरों पर राहत

इस देववाणी के बाद क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है। किसानों और बागवानों के चेहरों पर राहत साफ झलक रही है। कारदार बीरबल ठाकुर का कहना है कि लोगों को अभी एक सप्ताह तक धैर्य रखना होगा, उसके बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

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वर्षा, विपदा और संकट पर नियंत्रण की मान्यता

मान्यता के अनुसार, देवभूमि में सूखे जैसे हालातों के दौरान वर्षा करवाना या उसे रोकना, आपदा और विपदा से क्षेत्र की रक्षा करना बड़े देव विष्णु मतलोड़ा और देव चुंजवाला महादेव की दैवीय शक्तियों में शामिल है।

 

देव चुंजवाला महादेव को लेकर यह भी विश्वास है कि वे निसंतान दंपत्तियों को संतान प्राप्ति का वरदान देते हैं। घाटी में आज भी सैकड़ों परिवार ऐसे हैं, जो खुद को देवता की कृपा का साक्षात उदाहरण मानते हैं।

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भगवान विष्णु का रूप माने जाते हैं बड़े देव

बड़े देव विष्णु मतलोड़ा सराज घाटी के अत्यंत पूजनीय देवता हैं। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और उनका इतिहास महाभारत काल से जोड़ा जाता है। स्थानीय क्षेत्रों के संरक्षक देवता के रूप में उनकी मान्यता है।

 

उनके नाम पर कई किले, पंचायतें और स्थान प्रसिद्ध हैं। देवता की पूजा-अर्चना विशेष रूप से होम (यज्ञ), मुंडन संस्कार और सामूहिक धार्मिक अनुष्ठानों में की जाती है, जिसमें वे क्षेत्र को दैवीय शक्ति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

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देव समाज की निगाहें महामिलन पर

देव चुंजवाला कमेटी सात हार के अध्यक्ष देवराज रावत का कहना है कि यह देव मिलन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 25 वर्षों की प्रतीक्षा का अंत है। उन्होंने विश्वास जताया कि देव मिलन के बाद वर्षा होगी और क्षेत्र को सूखे से राहत मिलेगी।

बारिश के इंतजार में लोग

वहीं, सराज विधानसभा क्षेत्र समेत आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग, जो पिछले चार महीनों से बारिश के इंतजार में हैं, अब इस महामिलन पर आशा भरी निगाहें लगाए बैठे हैं। अगर देववाणी के अनुसार मिलन के बाद बारिश और बर्फबारी होती है, तो देव मतलोड़ा और देव चुंजवाला महादेव की आस्था और भी गहरी होगी।

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आस्था, एकता और परंपरा का संदेश

यह महामिलन देवभूमि हिमाचल प्रदेश में केवल देवताओं का नहीं, बल्कि आपसी सौहार्द, एकता और परंपराओं की जीत का प्रतीक माना जा रहा है। 25 साल की तकरार के बाद मिला यह समाधान आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक संदेश है कि आस्था और संवाद से हर विवाद का अंत संभव है।

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