#अव्यवस्था
January 21, 2026
हिमाचल डिप्टी CM की विधानसभा में बड़ा घोटाला : करोड़ों में खरीदी खाई और खड्ड वाली जमीन- जांच तेज
मामले में विजिलेंस की जांच शुरू, आने वाले दिनों में हो सकती हैं गिरफ्तारियां
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री के विधानसभा क्षेत्र हरोली में जमीन खरीद के नाम पर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (हिमुडा) ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों का घोटाला किया है।
हिमुडा ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसी जमीन को फ्लैट निर्माण के लिए खरीदा- जो न केवल निर्माण योग्य नहीं थी, बल्कि खाई-खड्डों और नालों से भरी हुई थी। इसके बावजूद करीब 600 कनाल भूमि को लगभग 28 करोड़ रुपये में खरीदकर जमीन मालिक को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
विजिलेंस ब्यूरो की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, इस जमीन खरीद की प्रक्रिया वर्ष 2013 में शुरू की गई थी। उस समय हरोली क्षेत्र में आवासीय फ्लैट विकसित करने की योजना बनाई गई थी। यह प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आरंभ हुई, जबकि जमीन की खरीद और भुगतान की औपचारिकताएं बाद में भाजपा शासनकाल के दौरान पूरी की गईं। हिमुडा ने यह भूमि जरनैल सिंह और उनके परिवार के अन्य हिस्सेदारों से खरीदी।
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे गंभीर सवाल खड़े करते हैं। विजिलेंस के अनुसार, जिस जमीन को फ्लैट निर्माण के लिए उपयुक्त बताया गया था, वह वास्तविकता में समतल नहीं है। वहां जगह-जगह गहरी खाइयां, प्राकृतिक नाले और ऊबड़-खाबड़ क्षेत्र मौजूद है।
मौजूदा हालात में भी उस भूमि पर किसी प्रकार का डेवलपमेंट प्लान लागू नहीं किया गया है, न ही वहां निर्माण से जुड़ी कोई गतिविधि दिखाई देती है। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि जमीन खरीद का उद्देश्य विकास नहीं, बल्कि आर्थिक लाभ पहुंचाना था।
विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया है कि जमीन की कीमत सर्किल रेट के आधार पर वास्तविक मूल्य से अधिक दर्शाई गई। इससे न केवल जमीन मालिक को करोड़ों का अनुचित फायदा हुआ, बल्कि सरकार को राजस्व नुकसान भी उठाना पड़ा। आरोप है कि मूल्यांकन के दौरान जानबूझकर तथ्यों को नजरअंदाज किया गया और रिपोर्ट में जमीन को उपयोगी बताकर सौदा मंजूर कराया गया।
इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जो विजिलेंस ब्यूरो तक पहुंची। शिकायत के आधार पर जब प्रारंभिक जांच की गई तो आरोप सही पाए गए। इसके बाद विजिलेंस ने जमीन मालिक के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब सरकार से औपचारिक जांच की अनुमति मिलने के बाद हिमुडा और राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस ने जांच का दायरा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा है। ऊना से लेकर शिमला सचिवालय तक हिमुडा के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों, राजनेताओं और अन्य प्रभावशाली लोगों के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग, मूल्यांकन रिपोर्ट और मंजूरी से संबंधित सभी तथ्य एकत्र कर लिए गए हैं। आने वाले दिनों में पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी फिरोज खान के नेतृत्व में गठित टीम इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जमीन की वास्तविक स्थिति, उसकी कीमत और खरीद प्रक्रिया से जुड़े हर पहलू की तकनीकी और कानूनी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
यह मामला केवल जमीन खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह साफ होगा कि विकास योजनाओं के नाम पर किस तरह सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर निजी लाभ पहुंचाया गया। अब सबकी नजर विजिलेंस की अंतिम रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।