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January 21, 2026

हिमाचल: DC ऑफिस के कर्मी को दिल्ली पुलिस ने किया अरेस्ट- गाड़ियों के नंबर के साथ कर रहा था झोल

सेकंड हैंड को फर्स्ट हैंड दिखाकर हुआ रजिस्ट्रेशन

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RLA bilaspur

बिलासपुर। हिमाचल में अक्सर लोग थानों, चेक पोस्ट और सड़क पर चल रही गाड़ियों पर ही शक करते हैं, लेकिन इस बार सवाल उस दफ्तर पर उठ रहे हैं, जहां से गाड़ी को कानूनी पहचान मिलती है। नंबर प्लेट, रजिस्ट्रेशन और मालिकाना हक की मुहर लगाने वाला सिस्टम ही अब जांच के घेरे में आ गया है। बिलासपुर का RLA ऑफिस इस वक्त एक ऐसे मामले को लेकर सुर्खियों में है, जिसने पूरे प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिलासपुर RLA ऑफिस पर दिल्ली क्राइम ब्रांच की दबिश

बिलासपुर में एसडीएम कार्यालय की रजिस्ट्रेशन ऑफ लाइसेंसिंग अथॉरिटी (RLA) शाखा इस समय दिल्ली क्राइम ब्रांच की जांच के दायरे में आ गई है। सेकंड और थर्ड हैंड गाड़ियों की खरीद-फरोख्त, सेकंड हैंड गाड़ियों को फर्स्ट हैंड दिखाकर रजिस्ट्रेशन और वीआईपी नंबरों के आबंटन में गड़बड़ी की आशंका को लेकर दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम बिलासपुर पहुंची।

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टीम ने उपायुक्त कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी को हिरासत में लिया और RLA से जुड़े अहम रिकॉर्ड अपने साथ दिल्ली ले गई है। इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

चोरी की वारदातों में इस्तेमाल गाड़ियों से खुला राज

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली क्राइम ब्रांच ने कई ऐसी गाड़ियों को ट्रेस किया है, जिनका इस्तेमाल चोरी की वारदातों में किया गया था। जांच में सामने आया कि इनमें से कुछ वाहन बिलासपुर RLA कार्यालय में रजिस्टर्ड हैं। प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि इन गाड़ियों को सेकंड हैंड होते हुए भी फर्स्ट हैंड बताकर रजिस्टर किया गया। यही कड़ी दिल्ली से बिलासपुर तक पहुंची और जांच एजेंसी को सीधे RLA ब्रांच के रिकॉर्ड खंगालने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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हिरासत में लिया गया कर्मचारी 

जानकारी के अनुसार हिरासत में लिया गया कर्मचारी वर्तमान में DC कार्यालय में बतौर सीनियर असिस्टेंट कार्यरत है। इससे पहले वह सदर बिलासपुर एसडीएम कार्यालय की आरएलए ब्रांच में डीलिंग हैंड के पद पर तैनात रह चुका है।

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आरोप है कि इसी दौरान गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन, ट्रांसफर और वीआईपी नंबर आबंटन की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं और अवैध तरीके से लाखों रुपये की वसूली की गई।

सेकंड हैंड को फर्स्ट हैंड दिखाकर हुआ रजिस्ट्रेशन

जांच एजेंसी को शक है कि कुछ मामलों में पुरानी गाड़ियों को नई दिखाकर दस्तावेज तैयार किए गए। इससे न सिर्फ सरकारी प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ हुआ, बल्कि आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो चुकी गाड़ियों को क्लीन पहचान दिलाने का रास्ता भी खुला।

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दिल्ली क्राइम ब्रांच अब जब्त किए गए रिकॉर्ड, डिजिटल एंट्री और गाड़ियों के पूरे डेटा का मिलान कर रही है। माना जा रहा है कि इस जांच में और भी कर्मचारियों की भूमिका सामने आ सकती है। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन दिल्ली क्राइम ब्रांच की इस एंट्री ने बिलासपुर RLA ऑफिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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