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August 14, 2025
हिमाचल का जवान पंचतत्व में विलीन, 8 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि; अनुराग ठाकुर ने दी श्रद्धांजली
घर पहुंची पार्थिव देह से लिपट कर खूब रोई पत्नी
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला के कुटलैहड़ के जवान अरुण कुमार का आज उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद जवान अरुण को उनके आठ साल के बेटे ने मुखाग्नि दी। इस दृश्य को देख कर वहां मौजूद हर शख्स की आंख नम हो गई। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे।
शहीद अरुण के साथ आई जवानों की टुकड़ी ने अपने जवान को अंतिम श्रद्धांजली दी। इस दौरान हर तरफ "भारत माता की जय"- "अरुण कुमार अमर रहे" के नारे गूंजते रहे। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी पहुंचे हुए थे। अनुराग ठाकुर ने जवान को श्रद्धांजली देने के उपरांत कहा कि हमारे जवानों की शहादत के चलते ही देश सुरक्षित है। जवानों की शहादत को कभी भूलाया नहीं जा सकता। उन्होंने शहीद जवान के परिजनों के प्रति संवेदन व्यक्त की।
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बता दें कि आज दोपहर करीब 12 बजे जवान की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव पहुंची, जैसे ही जवान की देह घर पहुंची तो हर तरफ से चीखने चिल्लाने की आवाजें आने लगी। पत्नी जवान की पार्थिव देह के साथ लिपट कर खूब रोई।
आपको बता दें कि जैसे ही अरुण की पार्थिव देह उनके घर पहुंची तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। अरुण के बुजुर्ग माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। अरुण की पत्नी रोते-रोते बेसुध हो गई। अरुण की बेटियों को जब सेना के जवानों ने तिरंगा और वर्दी सौंपी तो- हर कोई भावुक हो गया। बेटियां पिता की वर्दी को चूमती हुईं नजर आईं। अरुण का मासूम बेटा भी बार-बार पिता को पुकारते हुए उठने के लिए कहता हुआ नजर आया।
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जिले के कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में मातम का माहौल है। भारतीय सेना के बहादुर जवान हवलदार अरुण कुमार ‘लक्की’ (39) ने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। जैसे ही उनकी शहादत की खबर गांव तक पहुंची, पूरे क्षेत्र में गम की लहर दौड़ गई।
बताया जा रहा है कि अरुण कुमार का निधन दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ है। अरुण साल 2005 में 7-JK राइफल में भर्ती हुए थे और अब अरुण 20 साल की सर्विस के बाद बलिदानी हो गए। वर्तमान में अरुण अरुणाचल प्रदेश के डिब्रूगढ़ में अपनी सेवाएं दे रहे थे। मंगलवार सुबह अरुण व्यायाम कर रहे थे- इसी दौरान अचानक उन्हें दिल का दौर पड़ गया। वहां मौजूद साथियों द्वारा उन्हें कमांड अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक अरुण ने दम तोड़ दिया था।
शहीद अरुण अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। अरुण के परिवार में 13 और 10 साल की दो बेटियां, आठ साल का एक बेटा, पत्नी, छोटा भाई और माता-पिता हैं। अरुण की शहादत की खबर मिलने के बाद से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। बुजुर्ग माता-पिता के आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे हैं।
अरुण के दो बेटियां और एक बेटा है। अरुण की बड़ी बेटी 9वीं कक्षा, छोटी बेटी छठी कक्षा और छोटा बेटा अर्जुन तीसरी कक्षा में पढ़ता है। अरुण के निधन ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
परिजनों ने बताया कि अरुण चार महीने पहले ही छुट्टी पर घर आए हुए थे। अब उन्होंने दो महीने चचेरे भाई की शादी पर घर आना था। अरुण रोज घर पर फोन करते थे और सबसे बात करते थे। बीते सोमवार को भी अरुण ने सभी घरवालों से अच्छे से बात की। मगर किसी को क्या पता था कि ये बात आखिरी बार हो रही है।
अरुण के भाई मोहित ने बताया कि हर रोज सुबह करीब 4-5 बजे अरुण का मैसेज आता था। मगर मंगलवार को अरुण का कोई मैसेज नहीं आया और कुछ देर बाद अरुणाचल प्रदेश से कर्नल का फोन आया। कर्नल ने बताया कि अरुण को दिल का दौरा पड़ा है और उसकी मौत हो गई है।
हर कोई उन्हें एक निडर, कर्तव्यनिष्ठ और मिलनसार इंसान के रूप में याद कर रहा है, जिनका जीवन पूरी तरह मातृभूमि की रक्षा को समर्पित था। अरुण कुमार भारतीय सेना में लंबे समय से अपनी बहादुरी और अनुशासन के लिए पहचाने जाते थे।
अपने कार्यक्षेत्र में वे हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहकर जिम्मेदारियां निभाते थे। कर्तव्यपालन के दौरान उन्होंने जो बलिदान दिया, वह न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे हिमाचल और देश के लिए गर्व और दर्द का मिश्रण बन गया है।
शहीद का पार्थिव शरीर सेना के दस्ते के साथ उनके पैतृक गांव पहुंच गया है। यहां पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। परिवार का ढांढस बांधने के लिए मौके पर हिमाचल प्रदेश से भाजपा सांसद व पूर्व केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी पहुंच गए हैं। सेना और प्रशासन के उच्च अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पुलिस बल और हजारों की संख्या में स्थानीय लोग इस अंतिम यात्रा में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना में हवलदार एवं कुटलैहड़ निवासी श्री अरुण कुमार ‘लक्की’ जी का कर्तव्य पालन के दौरान निधन अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। यह राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी देश सेवा, साहस और समर्पण को सदैव याद रखा जाएगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और परिवार को यह गहन दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
जहां एक ओर परिजन और ग्रामीण उनकी असमय जुदाई से गहरे सदमे में हैं, वहीं दूसरी ओर उनके साहस पर गर्व भी महसूस कर रहे हैं। घर के बाहर और गलियों में लोग गमगीन चेहरों के साथ जुटे हुए हैं। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं आंखों में आंसू लिए बस यही कह रही हैं- “लक्की ने अपनी मिट्टी का मान बढ़ा दिया।”
गांव के लोग बताते हैं कि अरुण कुमार हमेशा युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे। छुट्टियों में आते तो बच्चों को खेलों में भाग लेने, अनुशासन और देशभक्ति की कहानियां सुनाते। उनकी मुस्कान और जिंदादिली अब सिर्फ यादों में रह जाएगी, लेकिन उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।