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August 14, 2025

हिमाचल : रात 3 बजे बादल फटने से मची तबाही- अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, स्कूलों में छुट्टियां

हर तरफ फैला मलबे का सैलाब

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Kothkhai Cloud Burst

शिमला। हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बीती रात भारी बारिश ने तबाही मचा दी। शिमला जिले के कोटखाई उपमंडल के खलटूनाला क्षेत्र में रात करीब तीन बजे पहाड़ियों पर बादल फटने से नाले में अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी उतर आया।

हिमाचल में फिर फटा बादल

तेज बहाव के साथ आए मलबे ने यहां खड़ी छह से अधिक गाड़ियों को बहा दिया और एक पेट्रोल पंप का आधा हिस्सा ढहाकर दबा दिया। हादसा अचानक हुआ, लेकिन पेट्रोल पंप पर ड्यूटी दे रहे कर्मचारी समय रहते भाग निकले, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई।

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सभी स्कूलों को बंद करने का ऑर्डर

भारी बारिश के चलते प्रशासन ने ऊना जिले, कुल्लू के बंजार उपमंडल और मंडी के थुनाग क्षेत्र के सभी स्कूल आज बंद रखने के आदेश जारी किए। शिमला, कुल्लू, सोलन और सिरमौर में भी लगातार हो रही वर्षा के कारण कई जगह भूस्खलन हुए, जिससे तीन नेशनल हाईवे समेत 500 से अधिक सड़कें पूरी तरह बंद हो गईं। शिमला में तो रात दो बजे से शुरू हुई तेज बारिश के बाद लोग घरों में बेचैनी से सुबह का इंतज़ार करते रहे।

 

किन्नौर जिले के पूह क्षेत्र में भी बीती शाम बादल फटने की घटना हुई। इसके बाद सतलुज नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे रामपुर बाज़ार में नदी किनारे स्थित घरों को एहतियातन खाली कराया गया।

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कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने आज चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि अन्य जिलों में यलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। विभाग का कहना है कि कल से पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता थोड़ी कम होगी, लेकिन कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश का क्रम जारी रहेगा।

भारी तबाही का आंकड़ा

प्रदेश में इस साल का मानसून अब तक भारी तबाही लेकर आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,031 करोड़ रुपये से अधिक की निजी और सरकारी संपत्ति का नुक़सान हो चुका है। 241 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 33 लोगों की जान भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाओं में गई, जबकि 36 लोग अभी भी लापता हैं।

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मकानों और दुकानों को भारी क्षति

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 523 घर पूरी तरह ढह गए हैं, जबकि 1,682 मकानों को आंशिक क्षति पहुंची है। इसके अलावा 312 दुकानें और 2,041 गोशालाएं भी इस मानसून में नष्ट हो चुकी हैं। पहाड़ी इलाकों में कई परिवार अब खुले आसमान के नीचे या अस्थायी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

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इस बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने एक बार फिर प्रदेश के लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता का एहसास करा दिया है। प्रशासन ने राहत व बचाव कार्यों को तेज कर दिया है, लेकिन मौसम के अगले 48 घंटे अभी भी चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।

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