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July 12, 2025
हिमाचल: 11 माह की निकिता का सहारा बनेंगे शिक्षक यवेश, 18 साल तक हर माह खाते में डालेंगे राशि
प्रशासन ने निकिता के नाम खोला है खाता, लोग मदद को आने लगे आगे
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में 30 जून को आई भीषण आपदा ने कई घरों को तबाह कर दिया है। इसी भीषण आपदा में एक 11 महीने की मासूम बच्ची निकिता का पूरा परिवार ही उससे छिन गया। 30 जून की रात भारी बारिश ने सराज विधानसभा क्षेत्र के परवाड़ा गांव में कहर बरपाया। तेज बहाव में निकिता के माता-पिता और दादी की जान चली गई, लेकिन चमत्कारिक रूप से यह मासूम बच्ची बच गई।
अपनों को खो चुकी इस मासूम के लिए प्रशासन ने एक बैंक खाता खोला है। जिसमें 25 हजार की राहत राशि डाली गई है। वहीं इस मासूम बच्ची के लिए अब आम जनता भी आगे आने लगी है। मंडी जिला के ही एक शिक्षक ने अगले 18 साल तक इस मासूम निकिता के बैंक खाते में एक तय रकम डालने का ऐलान किया है।
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सुंदरनगर के उप्पर बेहली गांव के जेबीटी शिक्षक यवेश राणा द्वरा उठाए गए इस कदम की हर कोई सराहना कर रहा है। उन्होंने मानवता की एक मिसाल पेश की है। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने ऐलान किया है कि वह निकिता के नाम खोले गए बैंक खाते में हर महीने अपने वेतन से 1000 रुपए जमा करेंगे और यह राशि जब तक निकिता 18 साल की नहीं हो जाती, तब त डालते रहेंगे।
यवेश राणा न केवल शिक्षक हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी भी रह चुके हैं। उनके इस निर्णय के पीछे एक गहरी संवेदना है। उन्होंने कहा कि मैं खुद एक पिता हूं और जब मैंने निकिता की कहानी पढ़ी, तो दिल भर आया। यह बच्ची अब केवल एक परिवार की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है। यवेश राणा के इस मानवीय पहल की सोशल मीडिया पर चारों ओर सराहना हो रही है। उनकी पोस्ट को हजारों लोगों ने साझा किया है और कई लोग निकिता की सहायता के लिए आगे आ रहे हैं।
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गोहर उपमंडल के परवाड़ा गांव में आई फ्लैश फ्लड में जहां निकिता ने अपने माता-पिता और दादी को हमेशा के लिए खो दिया, वहीं वो खुद चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गई। अब वह अपनी चाची तारा देवी की गोद में पल रही है, जिसने उसे अपनी संतान की तरह पालने की जिम्मेदारी उठाई है।
निकिता की मां, पिता और दादी- घर के पीछे से आए उफनते नाले के बहाव को मोड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कुदरत के आगे किसी की नहीं चली। बहाव तेज हुआ और तीनों बह गए। अब तक सिर्फ नरेश कुमार का शव बरामद हुआ है, जबकि बाकी दो अभी तक नहीं मिले।
सुबह जब गांव वाले मलबे के बीच जीवन की कोई झलक तलाश रहे थे, तब किसी ने निकिता के रोने की हल्की सी आवाज सुनी। जब लोग घर के बचे-खुचे ढांचे तक पहुंचे, तो देखा कि मासूम रसोई में अकेली पड़ी है- सहमी, पर सुरक्षित। जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे बचा ले गई हो। निकिता को वहां से बाहर निकाला गया और तब से वह अपने परिजनों की गोद में है, लेकिन उसके जीवन से अब माँ की लोरी और पिता का स्पर्श हमेशा के लिए मिट चुका है।
इस दर्दनाक खबर के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही देशभर से सैकड़ों लोगों ने निकिता को गोद लेने की पेशकश की। लेकिन बच्ची की चाची तारा देवी ने उसे अपने पास रखने का फैसला लिया है। तारा देवी और परिवार के अन्य सदस्यों ने साफ किया है कि वे निकिता को किसी अनजान हाथों में नहीं सौंपेंगे, बल्कि उसे घर के ही माहौल में प्यार और सुरक्षा के साथ बड़ा करेंगे।
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निकिता को अस्थायी रूप से बल्ह की SDM स्मृतिका नेगी ने संरक्षण में लिया था। बाद में उसे उसकी चाची तारा देवी को सौंपा गया। प्रशासन की ओर से अब तक ₹25,000 की तत्काल आर्थिक सहायता दी जा चुकी है, जबकि और भी सहायता राशि जल्द ट्रांसफर की जा रही है।
निकिता के नाम से एक विशेष बैंक खाता खोला गया है, जिसमें सरकारी मुआवजा और सार्वजनिक दान जमा किए जाएंगे। यह पैसा निकिता की शिक्षा और भविष्य के लिए संरक्षित रहेगा और 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर ही इसका उपयोग संभव होगा। इसकी निगरानी जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPO मंडी) द्वारा की जाएगी।
SDM ने बताया कि अब तक 150 से अधिक लोगों ने आर्थिक सहायता या अडॉप्शन के लिए संपर्क किया है। प्रशासन ने दो बैंक खातों की जानकारी साझा की है- जहां आम लोग भी दान कर सकते हैं:
निकिता आज भले ही अपनों से बिछड़ गई है, लेकिन समाज का साथ और चाची का प्यार उसकी नई ताकत बन गया है। प्रशासन की अपील है कि "लोगों का छोटा सा योगदान इस मासूम का संपूर्ण जीवन संवार सकता है।" निकिता अब सिर्फ एक परिवार की नहीं, पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी बन चुकी है।