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January 20, 2026

मंत्री विक्रमादित्य के विभाग ने सरकार से मांगे थे 45 लाख, ग्रामीणों ने 23 लाख में ही बना दी पूरी सड़क

महीनों तक दफ्तरों में घूमती रहीं फाइलें

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Kullu News

कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में विकास की रफ्तार और सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती एक मिसाल कुल्लू जिले के मनाली क्षेत्र से सामने आई है। जिस सड़क के चौड़ीकरण के लिए मंत्री विक्रमादित्य सिंह के विभाग यानी PWD ने 45 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर फाइलों में उलझा दिया था, वही काम स्थानीय ग्रामीणों ने आपसी सहयोग, श्रमदान और जमीन दान के जरिए महज 23 लाख रुपये में पूरा कर दिखाया।

कागजी कार्रवाई तक सीमित रही सरकार

मनाली की पर्यटन नगरी में नेहरूकुंड से पलचान तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी सड़क बुरुआ और शनाग पंचायतों से होकर गुजरती है। इस मार्ग का 100 से 150 मीटर का हिस्सा लंबे समय से बेहद संकरा था।

 

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खासकर नेहरूकुंड पुल से बुरुआ की ओर यह सड़क पर्यटन सीजन और सेब सीजन में भारी ट्रैफिक जाम का कारण बनती थी। स्थानीय लोग और सैलानी घंटों फंसे रहते थे, लेकिन बार-बार मांग उठाने के बावजूद सरकार और प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहे।

महीनों तक दफ्तरों में घूमती रहीं फाइलें

बीते वर्ष PWD ने इस सड़क सुधार के लिए 45 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया, लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। महीनों तक फाइलें दफ्तरों में घूमती रहीं। इससे निराश होकर ग्रामीणों ने खुद पहल करने का फैसला लिया।

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नॉर्थ मनाली विकास समिति के नेतृत्व में एक समिति बनाई गई और सड़क चौड़ीकरण का जिम्मा स्वयं उठा लिया गया। यह पहल न सिर्फ प्रशासनिक सुस्ती को उजागर करती है, बल्कि सामूहिक इच्छाशक्ति की ताकत भी दिखाती है।

आर्थिक सहयोग के साथ जमीन भी दी दान में

ग्रामीणों, पर्यटन कारोबारियों और स्थानीय फर्मों के आर्थिक सहयोग से 23 लाख रुपये जुटाए गए। इसके अलावा दो ग्रामीणों, गुप्त राम और तेंजिन ने अपनी लाखों रुपये मूल्य की जमीन दान कर दी, जिससे काम संभव हो सका। सड़क के दोनों ओर रिटेनिंग वॉल (डंगे) लगाए गए और अब यह सड़क 20 से 25 फुट चौड़ी हो चुकी है। इससे दोतरफा यातायात सुचारू हो गया है और जाम की समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है।

जाम से मिलेगी निजात

स्थानीय ग्रामीण तेंजिन का कहना है कि गर्मियों में यहां हालात बेहद खराब हो जाते थे। अब सड़क चौड़ी होने से सैलानियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों और सेब उत्पादकों को बड़ी राहत मिलेगी।

 

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नॉर्थ मनाली विकास समिति के अध्यक्ष वेद राम ठाकुर ने बताया कि अगर ग्रामीण जमीन दान न करते तो यह काम संभव नहीं था। बहरहाल, यह उदाहरण दिखाता है कि जब सरकार फाइलों में उलझी रहती है, तब जनता खुद विकास की राह बना सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे काम जनता को खुद करने चाहिए या सिस्टम को जिम्मेदारी निभानी चाहिए?

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