शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। पहले गैस सिलेंडर के दाम बढ़े, उसके बाद दूध महंगा हो गया और अब तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने सीधे तौर पर जनता की जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है। लेकिन महंगाई का यह बोझ यहीं थमता नजर नहीं आ रहा। अब प्रदेश में निजी बस ऑपरेटरों ने भी बस किराए में बढ़ोतरी की मांग उठाकर लोगों को एक और झटका देने के संकेत दे दिए हैं।

 

डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई करीब तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद हिमाचल निजी बस ऑपरेटर संघ ने सरकार से बस किराए में कम से कम 15 प्रतिशत वृद्धि करने की मांग की है। इसके साथ ही न्यूनतम बस किराया 15 रुपये तय करने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।

 

डीजल महंगा, बस संचालन हुआ मुश्किल

निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण बसों का संचालन करना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। डीजल के दाम बढ़ने से रोजाना का खर्च काफी बढ़ गया है। इसके अलावा वाहन रखरखाव, बीमा, टैक्स, स्पेयर पार्ट्स और कर्मचारियों के वेतन पर भी लगातार अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि मौजूदा किराए में परिवहन सेवाएं जारी रखना घाटे का सौदा बनता जा रहा है। उनका दावा है कि यदि समय रहते किराए में बढ़ोतरी नहीं की गई तो कई रूटों पर बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

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15 रुपए मांगा न्यूनतम बस किराया

प्रदेश के निजी बस ऑपरेटरों ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में निजी बसें ग्रामीण क्षेत्रों की जीवनरेखा हैं। कई दूरदराज इलाकों में आज भी लोग निजी बस सेवाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में बढ़ती लागत के बीच बिना किराया बढ़ाए सेवाएं जारी रखना कठिन हो गया है। ऑपरेटरों ने सरकार को याद दिलाया कि पंजाब और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों में न्यूनतम बस किराया पहले से 15 रुपये निर्धारित है, जबकि हिमाचल में ऑपरेटर लंबे समय से कम किराए में सेवाएं देने को मजबूर हैं।

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सरकार से विशेष बैठक बुलाने की मांग

हिमाचल निजी बस ऑपरेटर संघ ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघ ने मांग की है कि परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जल्द विशेष बैठक आयोजित की जाए, ताकि निजी बस ऑपरेटरों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कर समाधान निकाला जा सके। संघ की ओर से जारी संयुक्त बयान में अध्यक्ष राजेश पराशर, उपाध्यक्ष विजय ठाकुर, महासचिव रमेश कमल समेत विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों ने कहा कि परिवहन क्षेत्र लगातार आर्थिक दबाव झेल रहा है और सरकार को जल्द राहत देने वाले कदम उठाने चाहिए।

 

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आम जनता पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

यदि सरकार बस किराए में बढ़ोतरी को मंजूरी देती है तो इसका सीधा असर रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों पर पड़ेगा। नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में आने-जाने वाले लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। प्रदेश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अब लोगों को डर सताने लगा है कि आने वाले दिनों में रोजमर्रा की जरूरतों के साथ सफर भी और महंगा हो सकता है।

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