शिमला। हिमाचल प्रदेश में लोहड़ी का पर्व हर साल की तरह इस साल भी बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। लेकिन इस बार लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि यह त्योहार 13 जनवरी को होगा या 14 जनवरी को। साथ ही यह भी देखने वाली बात है कि लोहड़ी मनाने का सही समय कब रहेगा, ताकि लोग परंपरा के अनुसार इसे बड़े उत्साह के साथ मना सकें।

इस दिन मनाई जाएगी  लोहड़ी 

बता दें कि, लोहड़ी का त्योहार हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को है, इसलिए लोहड़ी 13 जनवरी को होगी। यह पर्व खासकर सर्दियों के मौसम में आता है और इसे नए साल की शुरुआत, खुशियों और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। 

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अग्नि में इस समय दे आहुति

लोहड़ी का सबसे खास और प्रसिद्ध रिवाज है आग जलाना। लोग आग में गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, गजक और पॉपकॉर्न जैसी चीज़ें डालते हैं। इसके चारों ओर लोग नाचते और गीत गाते हैं। पंचांग के   अनुसार,  इस साल आहुति देने का शुभ समय शाम 5:34 बजे से रात 8:12 बजे तक है। आहुति देने के बाद लोग खुद भी ये मिठाइयाँ और मक्का खाते हैं। इसके अलावा, कई घरों में मक्के की टोटी और सरसों का साग भी बनता है, जिसे परिवार और पड़ोसियों के साथ मिलकर आनंदपूर्वक खाया जाता है।

लोहड़ी के दिन इन देवी-देवता की करें पूजा

वहीं, लोहड़ी के दिन भगवान श्रीकृष्ण, मां आदिशक्ति और अग्नि देव की खास पूजा की जाती है। लोग इस अवसर पर प्रकृति और सूर्य भगवान का धन्यवाद भी अर्पित करते हैं। सर्दियों की ठंडी रातों में यह पर्व गर्म आग, गीत, नाच और स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ पूरे परिवार और समुदाय के लिए खुशी और ऊर्जा का माहौल बनाता है।

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 गीतों में गाई जाती हैं लोहड़ी के बहादुरी की कहानियां

लोहड़ी के गीतों और लोककथाओं में अक्सर दुल्ला भट्टी का नाम आता है। कहा जाता है कि अकबर के समय पंजाब में लड़कियों को अमीन सौदागरों से बेचा जा रहा था। दुल्ला भट्टी ने उन लड़कियों को बचाया और उनकी शादी करवाई। तभी से उसकी वीरता और बहादुरी की कहानियां लोहड़ी के गीतों में गाई जाती हैं।

 फसल पकने और अच्छी खेती का माना जाता है प्रतीक 

इस पर्व का असली महत्व फसल पकने और अच्छी खेती का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार किसानों और आम लोगों के लिए खुशियों और उल्लास का अवसर है। लोग इकट्ठा होकर सूर्य भगवान और अग्नि देव का आभार व्यक्त करते हैं। लोहड़ी न केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि यह सामाजिक एकता, मेलजोल और एक-दूसरे के साथ खुशियाँ साझा करने का भी समय है।

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