चंबा। भगवान भोलेनाथ के पवित्र धाम मणिमहेश की वार्षिक यात्रा का आज से विधिवत शुभारंभ हो गया है। हिमाचल प्रदेश के भरमौर क्षेत्र में शुरू हुई इस कठिन धार्मिक यात्रा में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं।
मणिमहेश यात्रा आज से शुरू
सोमवार शाम तक ही भरमौर में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ जुट गई थी। प्रशासन ने यात्रा को व्यवस्थित और सुरक्षित ढंग से संचालित करने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। इस बार श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण से लेकर स्वास्थ्य जांच, सुरक्षा व्यवस्था, आवास और भोजन तक की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।
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पंजीकरण के बिना नहीं होगी अनुमति
मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि बिना पंजीकरण किसी भी व्यक्ति को यात्रा मार्ग पर आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसका उद्देश्य यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या पर नजर रखना और किसी भी आपात स्थिति में उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
रोजाना 5000 श्रद्धालु होंगे रवाना
यात्रा को नियंत्रित रखने के लिए भरमौर से प्रतिदिन सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को आगे भेजा जाएगा। प्रशासन की योजना के अनुसार रोजाना करीब 5 हजार यात्रियों को मणिमहेश की ओर रवाना किया जाएगा। इससे रास्तों पर अत्यधिक भीड़ नहीं होगी और सुरक्षा व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा।
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हड़सर बेस कैंप में होगी स्वास्थ्य जांच
मणिमहेश यात्रा की कठिनाई को देखते हुए स्वास्थ्य जांच को यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। हड़सर स्थित बेस कैंप में श्रद्धालुओं का मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। जो लोग यात्रा के लिए शारीरिक रूप से फिट नहीं पाए जाएंगे, उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
किन लोगों नहीं मिलेगी अनुमति?
विशेष रूप से अधिक उम्र के और अस्वस्थ श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जाएगी। 75 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे लोगों को, जिनकी सेहत यात्रा के अनुकूल नहीं होगी, आगे जाने से रोका जा सकता है। प्रशासन का मानना है कि धार्मिक आस्था के साथ श्रद्धालुओं की जान की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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कठिन रास्ता बढ़ाता है चुनौती
मणिमहेश यात्रा समुद्र तल से लगभग 13,385.83 फीट की ऊंचाई तक पहुंचती है। इतनी अधिक ऊंचाई पर जाने के कारण श्रद्धालुओं को सांस लेने में परेशानी और ऑक्सीजन की कमी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि यात्रा से पहले श्रद्धालुओं की फिटनेस की जांच जरूरी की गई है।
आसान नहीं है यात्रा
मणिमहेश तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है। यात्रियों को खड़ी चढ़ाई, पहाड़ी पगडंडियों, नालों और कठिन प्राकृतिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। मौसम में अचानक बदलाव भी यात्रा को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। ऐसे में प्रशासन श्रद्धालुओं से स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूरी तरह पालन करने की अपील कर रहा है।
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सुरक्षा के लिए हजारों जवान
यात्रा मार्ग और विभिन्न पड़ावों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। भरमौर प्रशासन ने करीब एक हजार पुलिस और होमगार्ड जवानों को यात्रा व्यवस्था में लगाया है। ये जवान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और किसी भी आपात स्थिति से निपटने में अहम भूमिका निभाएंगे।
40 हजार से ज्यादा जवान तैनात
इस बार यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में आईटीबीपी के 40 से अधिक जवान भी तैनात किए गए हैं। पहली बार उनकी तैनाती से ऊंचाई वाले और संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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चार हेली टैक्सियां भी रहेंगी उपलब्ध
पैदल यात्रा के अलावा श्रद्धालुओं के लिए हेली टैक्सी की सुविधा भी शुरू की गई है। इस बार चार हेलीकॉप्टर श्रद्धालुओं को मणिमहेश पहुंचाने और वहां से वापस लाने का कार्य करेंगे। हालांकि, हेलीकॉप्टर सेवा पूरी तरह मौसम की स्थिति पर निर्भर रहेगी।
कैसा बनता है मौसम?
यदि बारिश, घना कोहरा या अन्य प्रतिकूल मौसम की स्थिति बनती है तो उड़ानों को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है। प्रशासन और सेवा संचालक मौसम को देखते हुए ही उड़ानों का निर्णय लेंगे। वहीं, जो श्रद्धालु पैदल यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए घोड़े और खच्चरों की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
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यात्रा मार्ग पर पांच प्रमुख स्थानों पर बनाए गए कैंप
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यात्रा मार्ग पर पांच महत्वपूर्ण स्थानों पर कैंप स्थापित किए गए हैं। भरमौर, हड़सर, धनछो, सुंदरासी और गौरीकुंड में बनाए गए इन कैंपों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
श्रद्धालुओं को मिलेगी तुरंत सहायता
कैंपों में मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी, ताकि किसी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर तुरंत सहायता दी जा सके। यात्रा के दौरान जगह-जगह लंगर की व्यवस्था भी की गई है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के रुकने के लिए टेंट और अस्थायी ठहराव की सुविधाएं तैयार की गई हैं।
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कई राज्यों से पहुंचते हैं भोलेनाथ के भक्त
मणिमहेश यात्रा केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि हर वर्ष देश के कई हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में शिव भक्त भरमौर पहुंचते हैं।
श्रद्धालु की संख्या बढ़ी...
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन के सामने यात्रा को सुचारू रूप से संचालित करना बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसीलिए पंजीकरण, स्वास्थ्य जांच और प्रतिदिन सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को आगे भेजने जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
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कैलाश शिखर से जुड़ी है भगवान शिव की मान्यता
मणिमहेश धाम को भगवान शिव की आस्था से जुड़ा अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। यहां स्थित कैलाश पर्वत की चोटी श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है। मान्यता है कि भगवान शिव इसी कैलाश शिखर पर निवास करते हैं और पवित्र मणिमहेश झील से इस पर्वत का दिव्य स्वरूप दिखाई देता है।
भोलेनाथ के दर्शनों को उमड़ी भीड़
हिंदू आस्था में इस यात्रा का विशेष स्थान है और हर साल जन्माष्टमी के आसपास बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन रास्तों को पार करते हुए भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अगस्त और सितंबर के दौरान होने वाली इस यात्रा में प्राकृतिक सौंदर्य के बीच श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
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सदियों पुरानी यात्रा की परंपरा
मणिमहेश यात्रा की शुरुआत को लेकर भी प्राचीन मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि इस धार्मिक परंपरा का इतिहास कई सदियों पुराना है और स्थानीय शासक साहिल वर्मन से भी इसकी मान्यता मान्यता जुड़ी है। लोक मान्यताओं के अनुसार उन्हें भगवान शिव के दर्शन हुए थे, जिसके बाद मणिमहेश क्षेत्र में धार्मिक स्थल स्थापित करने की प्रेरणा मिली।
देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु
आज भी यह यात्रा लाखों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बनी हुई है। कठिन चढ़ाई, बदलता मौसम और ऊंचाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारों के साथ मणिमहेश की ओर बढ़ते हैं। इस बार प्रशासन ने भी साफ कर दिया है कि आस्था के इस सफर में सुरक्षा और स्वास्थ्य नियमों का पालन करना प्रत्येक श्रद्धालु के लिए जरूरी होगा।
