शिमला। सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां भगवती पूरे 9 दिन के लिए धरती पर आती हैं। इस दौरान वे अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। आज पांचवीं नवरात्रि है। आज मां स्कंदमाता का दिन है। आज विधि-विधान के साथ मां स्कंदमाता की पूजा की जा रही है। आइए इनसे जुड़ी जानकारी आपको देते हैं।
मां स्कंदमाता की हैं 4 भुजाएं
मान्यता है कि जिन लोगों के जीवन में संतान सुख नहीं है, उन्हें स्कंदमाता की अराधना करनी चाहिए। मां स्कंदमाता की 4 भुजाएं हैं। दाईं तरफ ऊपर वाली भुजा से में मां भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं।
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पूजा से होगी मोक्ष की प्राप्ति
नीचे वाली भुजा में कमल के फूल हैं। वहीं बाईं करफ ऊपर वाली भुज वरदमुद्रा में है। नीचे वाली भुजा में कमल के फूल हैं। इसी वजह से उन्हें पद्मासाना देवी के नाम से भी जानते हैं। माना गया है कि मां की पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मां को लगता है केले का भोग
नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को तरह-तरह का भोग लगाया जाता है। आज पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए। फिर इस प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।
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मां पूरी करती हैं मनोकामनाएं
इस प्रसाद को ग्रहण करने से संतान और स्वास्थ्य की बाधाएं दूर होती हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि मां स्कंदमाता की अराधना से भक्तों की सारी कामनाएं पूरी हो जाती हैं।
भवसागर पार करना आसान
मां स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनके उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाते हैं। अगर मन को एकाग्र व पवित्र रखकर मां की पूजा की जाती है तो भक्तों के भवसागर पार करने में मुश्किल नहीं आती।
