मंडी। हिमाचल प्रदेश का मंडी जिला छोटी काशी कहलाता है। ये देवी-देवताओं की धरती है। प्राचीन संस्कृति को संजोए हुए ये जिला देवी-देवताओं के रथ भी तैयार करता है। आइए जानते हैं कि रथ तैयार वक्त किन चीजों का पालन किया जाता है।
सपने में होते हैं देव दर्शन
रथ बनाने की प्रक्रिया एक दिव्य संकेत से प्रारंभ होती है। मान्यता है कि गांव में जब जमीन की खुदाई के दौरान विशेष प्रकार की धातु की मोहरें निकलती हैं तो उसी रात एक व्यक्ति को सपना आता है जिसमें देवता दर्शन देते हैं और इन मोहरों के बारे में बताते हैं।
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लकड़ी से तैयार होता है रथ
इसके बाद मोहरों को पूजन विधि के साथ प्रतिष्ठित किया जाता है। समय के साथ दूसरी जगहों पर भी इस तरह की दिव्य मोहरें निकलती हैं। फिर लकड़ी की मदद से एक रथ तैयार किया जाता है। इसके चारों ओर इन मोहरों को सजाया जाता है।
गांव में होती है शोभायात्रा
रथ बनाने के बाद उसकी पूजा और प्रतिष्ठा की जाती है। इसके बाद रथ को गांव और आसपास की जगहों में शोभायात्रा के रूप में घुमाया जाता है। अलग-अलग गांव के लोग देवता को आमंत्रण देते हैं। फिर उनका आतिथ्य कर आशीर्वाद पाते हैं।
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बुरी चीजों से होती है रक्षा
कहा जाता है कि देवता नेगेटिव एनर्जी से रक्षा करते हैं और सुख-शांति बनाए रखते हैं। हालांकि अब नए देव-रथों का निर्माण बहुत कम होता है। हालांकि पुराने रथ आज भी पूरे सम्मान और विधिपूर्वक प्रयोग में लाए जाते हैं।
250 से ज्यादा देवी-देवता
मंडी जिले में देवी-देवताओं के लिए गहरी आस्था है। इसका प्रमाण इसी से मिल जाता है जब अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में जिले के 250 से ज्यादा देवी-देवता राजदरबार में अपनी हाजिरी लगते हैं।
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मंडी में बनना है शिवधाम
मंडी को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है। छोटी काशी मंडी में कई शिव मंदिर हैं। इनमें कई मंदिर ऐसे हैं जहां पर पूरा साल धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं। इसी कारण प्रदेश सरकार ने मंडी में शिवधाम स्थापित करने का फैसला भी लिया है।
