#धर्म
August 21, 2025
हिमाचल प्रदेश में आज डायनें करेंगी डांस, सुरक्षाकवच के अंदर रहेंगे स्थानीय लोग
रक्षा बंधन के 10 दिन बाद डगौली
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला, सिरमौर, सोलन, कुल्लू और अप्पर हिमाचल के अलग-अलग रीजन्स में आज डायन फेस्टिवल मनाया जाएगा। ये फेस्टिवल पूरे 2 दिनों तक चलेगा। इसमें डायनें डांस करेंगी और लोग अपने घरों के अंदर रहेंगे, वो भी सुरक्षा कवच के बीच।
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इन दो रातों में डायनें पूरी तरह आजाद होती हैं। डायनें किसी भी मनुष्य, पशु या फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। इसी वजह से गांव वाले अपने घरों और खेतों को सुरक्षा कवच से ढक लेते हैं।
रक्षा बंधन के 8-10 दिन बाद मनाए जाने वाले इस पर्व को डगैली कहते हैं। डगैली पर्व दो दिन चलता है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को छोटी डगैली और उसके अगले दिन अमावस्या को बड़ी डगैली।
मान्यता डगैली पर्व को पूतना की कथा से भी जोड़ती है जो जन्माष्टमी के बाद नन्हे कृष्ण को मारने आई थी। कहा जाता है कि इन दो दिनों में डायनों का असर खासकर बच्चों और असहाय लोगों पर ज्यादा होता है।
डायनों का नृत्य आम इंसान नहीं देख सकता मगर तांत्रिक, पुजारी या देवता के गुर और गणिता इसे अनुभव कर पाते हैं। इनसे बचाव के लिए रक्षा सूत्र, देवता जी के चावल और विशेष मंत्रों से तैयार सरसों का इस्तेमाल होता है।
यही चावल और सरसों घर, पशुशाला और खेतों में डाले जाते हैं ताकि बुरी शक्तियों का असर दूर रहे। इसके अलावा भेखाल की झाड़ियां और तिरिमिर की टहनियां घर के चारों ओर लगाई जाती हैं।
इतना ही नहीं, डायनों को डराने के लिए प्रतीकात्मक बलि भी दी जाती है। कहीं खीरे तो कहीं धिन्धड़े को देहलीज पर काटा जाता है। मान्यता है कि इस आवाज से डायनें पास नहीं फटकतीं।
आज डगैली जैसे पर्व भले ही कुछ लोगों को अंधविश्वास लगे लेकिन यही वो लोकमान्यताएं हैं- जो हिमाचल की उस सांस्कृतिक धरोहर को बचाए रखती हैं जो इस पहाड़ी जीवन को रहस्यमयी और अनोखा बनाती हैं।