कांगड़ा। जब-जब भक्तों पर संकट आता है तो भगवान साथ खड़े हो जाते हैं और जब कोई संकट आने वाला होता है तो बाबा लाल भैरव की आंखों से आंसू बहने लगते हैं। हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है जहां स्थापित बाबा लाल भैरव की मूर्ति आने वाले संकट का इशारा दे देती है।

बाबा भैरव की 5000 साल पुरानी मूर्ति

कांगड़ा में मां बज्रेश्वरी का मंदिर स्थित है। इसी मंदिर में बाबा लाल भैरव की 5000 साल पुरानी मूर्ति भी विराजमान है। बाबा लाल भैरव की यही मूर्ति संकट के आने से पहले ही भक्तों को संकेत दे देती है। ऐसे में मंदिर में पूजा अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं जिससे बाबा लाल भैरव संकट को दूर कर देते हैं।

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संकट के संकेत में बहने लगते हैं आंसू

मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में जैसी ही कोई परेशानी आने वाली होती है तो बाबा लाल भैरव की मूर्ति से आंसू बहने लगते हैं। इस से स्थानीय नागरिक समझ जाते हैं कि कोई विपदा आने वाली है। बाबा लाल भैरव संकट को दूर करें इसलिए हवन भी करवाए जाते हैं।

आंसू निकलने के बाद हुआ अग्निकांड

साल 1976-1977 में बाबा लाल भैरव की मूर्ति से आंसू व पसीना निकला था। इसी दौरान कांगड़ा बाजार में भीषण अग्निकांड हुआ। बहुत दुकानें जल गईं। इसके बाद से यहां ऐसी विपत्ति टालने के लिए हर साल नवंबर व दिसंबर के मध्य में भैरव जयंती मनाई जाती है जिसमें पाठ व हवन का आयोजन होता है।

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मंदिर में शीश नवाने आते हैं मुस्लिम

बज्रेश्वरी देवी मंदिर कांगड़ा शहर के समीप मालकड़ा पहाड़ी की ढलान पर उत्तर की ओर नगरकोट में स्थित है। यहां तीन धर्मों के प्रतीक के रूप में मां की 3 पीण्डियों की पूजा की जाती है। मंदिर में सिर्फ हिंदू नहीं बल्कि मुस्लिम और सिख धर्म के लोग भी शीश नवाने आते हैं जो इसे अनूठा बनाता है।

तीन धर्मों का प्रतीक है ये शक्तिपीठ

बज्रेश्वरी देवी मंदिर के तीन गुंबद भी इन तीन धर्मों के प्रतीक हैं। मंदिर तंत्र-मंत्र, सिद्धियों, ज्योतिष विद्याओं, तन्त्रोक्त शक्तियों, देव परंपराओं की प्राप्ती का पसंदीदा स्थान रहा है। ये एक शक्ति पीठ है जहां माता सती का दाहिना वक्ष गिरा था इसलिए इसे स्तनपीठ भी कहा जाता है।