कांगड़ा। आपने अपनी जिंदगी में 'पैसों की बारिश' वाक्यांश का इस्तेमाल जरूर किया होगा लेकिन क्या आपने कभी 'अखरोटों की बारिश' के बारे में सुना है ? ये अविश्वसनीय घटना देव भूमि हिमाचल के कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ मंदिर में होती है। यहां हर साल बैकुंठ चौदस (कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले) के शुभ अवसर पर हजारों अखरोटों की बारिश होती है।
सब कुछ छीनने के बाद भी देवता बलशाली
पौराणिक कथा के मुताबिक शंखासुर नामक दैत्य ने इंद्र के सिहासन पर कब्जा कर लिया था। सारे देवता गुफा में रहने के लिए मजबूर हो गए थे। राज करते वक्त शंखासुर को लगा कि उसने देवताओं का सब कुछ छीन लिया लेकिन देवता अभी भी बलशाली हैं।
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ब्रह्मा जी को उठाने पड़ गए भगवान विष्णु
शंखासुर को लगा कि देवताओं की सारी शक्ति उनके बीज मंत्र में है इसलिए उसने बीज मंत्र को चुराने के बारे में सोचा। ऐसे में देवता समस्या के समाधान के लिए भगवान ब्रह्मा से मदद मांगने गए। ब्रह्मा ने देवताओं के साथ 6 महीनों से सो रहे भगवान विष्णु को उठाया।
शंखासुर का वध कर वापस दिलाया राजपाठ
सहायता की गुहार पर भगवान विष्णु ने मतस्य रूप धारण कर समुद्र में वेदों के बीज मंत्रों की रक्षा की। शंखासुर का वध करके देवताओं को उनका राज-पाठ वापिस दिलवाया। इसी खुशी में शिव मंदिर बैजनाथ में अखरोटों की बारिश की जाती है।
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2 किलो अखरोट के साथ शुरू हुई थी परंपरा
अखरोटों की बारिश काफी वर्षों से चल रही है। पहले सिर्फ 2 किलो अखरोट वितरित किए जाते थे लेकिन अब बैकुंठ चौदस पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। इस मौके पर पुजारी अखरोटों की बारिश करते हैं और भक्त इसे शिव प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
15-18 हजार तक पहुंची अखरोटों की संख्या
2 किलो अखरोट से शुरू हुई ये परंपरा आज 15 से 18 हजार अखरोटों तक पहुंची गई है। हर साल बैकुंठ चौदस पर बड़े ही उत्साह के साथ पुजारी मंदिर से हजारों अखरोटों को श्रद्धालुओं के बीच फेंकते हैं और श्रद्धालु खुशी-खुशी अखरोट लेकर घर लौट जाते हैं।
