बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में एक ऐसे देवता का वास है जो वर्षों पहले कुल्लू की रानी के साथ यहां आए थे। पूरे बिलासपुर में इस मंदिर की खास मान्यता है और इसे धौलरा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में विराजमन देवता बाबा नाहर सिंह जी हैं। ये देवता कुल्लू के राजपरिवार के कुल देवता भी हैं।
नहीं हिल रही थी रानी की डोली
कहलूर रियासत के राजा दीपचंद कुल्लू में कुमकुम राजकुमारी से विवाह करने गए थे। जब विदाई होने लगी तो राजकुमारी की डोली भारी हो गई। कहार डोली को उठा नहीं पा रहे थे। पूरा जोर लगाने के बाद भी डोली अपनी जगह से हिली नहीं। सब हैरान थे कि ऐसा क्यों हो रहा है।
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कुल्लू से कहलूर आए थे देवता
राजा ने पुरोहित से इस बारे में पूछा तो जवाब मिला कि देवता नाराज हैं और राजकुमारी के साथ कहलूर यानी बिलासपुर जाना चाहते हैं। जैसे ही राजा ने इस बात के लिए हामी भरी, डोली फूलों की तरह हल्की हो गई। फिर बाबा की चरण पादुका राजकुमारी की डोली के साथ कहलूर आई थी। फिर राजा ने अपने मंदिर के करीब ही बाबा नाहर का मंदिर बनवाया।
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कुल्लू में भी होती है इनकी पूजा
बिलासपुर में बाबा नाहर सिंह जी का प्राचीन मंदिर आज भी विभिन्न आयोजनों का स्थान है। श्रद्धालू लगातार इस मंदिर में माथा टेकने आते हैं। कुल्लू में भी इन्हीं देवता की पूजा भक्तिभाव और विश्वास के साथ की जाती है। बता दें कि मंदिर में हर साल ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार को मेला लगता है।
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नई फसल पर चढ़ाया जाता है रोट
श्रद्धालू नंगे पांव बाबा का आर्शीवाद लेने आते हैं। कहते हैं बाबा को आटे का मीठा रोट, सुपारी, गूगल धूप और लौंग इलायची पसंद है। जब नई फसल आती है तो भी लोग बाबा को रोट चढ़ाते हैं। विवाह, पुत्र प्राप्ति जैसे मौकौं पर लोग जात्रा लेकर नाचते गाते यहां पहुंचते हैं।
