धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज तपोवन में शुरू होते ही राजनीतिक गर्माहट बढ़ गई। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने पंचायती राज चुनावों पर स्थगन प्रस्ताव रखते हुए तत्काल चर्चा की मांग की। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद प्रश्नकाल को रोककर इस मुद्दे पर बहस शुरू की गई।
“विपक्ष की यह आदत बन गई है”
चर्चा की अनुमति देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष हर सत्र में कार्यवाही रोकने का प्रयास करता है, लेकिन सरकार उनकी भावनाओं का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, परंतु चर्चा हमेशा तथ्यों और संवैधानिक दायरे में होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार पंचायती चुनावों के मुद्दे पर पूरी पारदर्शिता से चर्चा करने के लिए तैयार है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में परिवार को मिला चार साल पहले खोया शख्स : पिता के गले लग फूट-फूट कर रोए बेटे
नियम 67 के अंतर्गत शुरू हुई बहस
नियम 67 के अंतर्गत शुरू हुई इस बहस में सबसे पहले बिलासपुर जिले के श्रीनयना देवी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रणधीर शर्मा बोले। उन्होंने कहा कि आपदा का हवाला देकर पंचायत चुनाव टालना उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि “पहाड़ों में उस समय भी मतदान प्रक्रियाएं पूरी होती थीं जब सड़कें और सुविधाएं आज की तरह विकसित नहीं थीं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में सरकारी स्कूल के हाल बेहाल : बच्चों को परोसे जा रहे कीड़े वाले चावल
सरकार जनता का संवैधानिक अधिकार सीमित करने का प्रयास कर रही है।” रणधीर शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि जिस मंडी जिले में इस वर्ष आपदा का सबसे अधिक नुकसान हुआ, उसी जिले में सरकार अपने तीन वर्ष पूरे होने का समारोह मना रही है। उनके अनुसार यह सरकार की आपदा के प्रति गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
“जश्न नहीं, व्यवस्था परिवर्तन का संकल्प”
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि मंडी में आयोजित कार्यक्रम किसी तरह का उत्सव नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा किए जा रहे व्यवस्था परिवर्तन और सुधारों की दिशा में किए कामों की समीक्षा का अवसर है।
यह भी पढ़ें : सुक्खू सरकार बेरोजगारों को विदेश में दिलाएगी नौकरी : हर महीने मिलेगी एक लाख सैलरी
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी संविधान और कानून की सबसे बड़ी संरक्षक रही है और पंचायती चुनावों पर सरकार का हर कदम कानूनी रूप से सही प्रक्रिया का पालन करते हुए उठाया जा रहा है। सत्र के पहले ही दिन पंचायती चुनावों पर चली इस गर्मागर्म बहस के बाद यह साफ है कि अगले कुछ दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक हलकों में केंद्र में रहेगा।
