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November 26, 2025

हिमाचल में परिवार को मिला चार साल पहले खोया शख्स : पिता के गले लग फूट-फूट कर रोए बेटे

सही-सलामत देख परिवार के नहीं रुके खुशी के आंसू

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Manohar Singh Bihar Paonta Sahib

सिरमौर। कहते हैं आंगन में जिसकी हंसी की गूंज थी, वो परछाई बनकर कहीं गुम हो गया। मगर वक्त के धागे ने ऐसा रंग दिया, कि बिछड़ा हुआ फिर से रूबरू हो गया। ऐसा ही कुछ सिरमौर जिले में एक व्यक्ति के साथ हुआ है- जो कि करीब चार साल बाद अपने परिवार से मिला है।

घर से हुआ था लापता

आपको बता दें कि ये व्यक्ति चार साल पहले घर से लापता हो गया था। उसके बाद से इसका कुछ अता-पता नहीं चल पाया था। परिजनों ने तो उसे मृत समझ लिया था। मगर कहते हैं ना किस्मत जब करवट लेती है तो वो कई चमत्कार कर जाती है।

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4 साल बाद मिला परिवार

दरअसल, अब 4 साल बाद परिवार को व्यक्ति सुरक्षित मिला है। सिरमौर जिले के लोगों ने मानवता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए परिवार से बिछड़े हुए व्यक्ति को 4 साल बाद उसके परिवार से मिलवाया है।

बस स्टैंड पर था अकेला

बताया जा रहा है कि बीती 23 नवंबर को शिलाई विधानसभा क्षेत्र की कठवार पंचायत के रहने वाले संजय कुमार को सतौन से फोन पर जानकारी मिली थी। उन्हें फोन पर बताया गया कि 

एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति पावंटा साहिब से सतौन बस स्टैंड पर पहुंचा है।

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संजय कंवर ने उस व्यक्ति का उस रात वहीं पर ठहरने और खाना खाने का पूरा प्रबंध करवाया। फिर अगली सुबह यानी 24 नवंबर को उसे पावंटा साहिब लाया गया- जहां पर बातचीत के दौरान उसने अरवा नाम मनोहर (50) बताया और बताया कि वो नालंदा जिला, बिहार के गांव बहादुरपुर का रहने वाला है।

बेटे का आया फोन

संजय ने इंटरनेट कते माध्यम से नालंदा जिले के SP के साथ संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी। कहानी में मोड़ तब आया जब कुछ ही देर में संजय को मनोहर के बेटे उजीत कुमार और चाचा विश्वेश्वर दास का फोन आया। उन्होंने बताया कि वो चार साल पहले कहीं लापता हो गया था। उन्होंने उसके जिंदा होने की उम्मीद छोड़ दी थी।

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सही-सलामत देख छलके खुशी के आंसू

वहीं, पिता के सही-सलामत होने की बात सुनते ही बीते कल उजीत बिहार से अपनी मां और छोटे भाई के पांवटा साहिब पहुंच गया। पति को अपनी आंखों के सामने सुरक्षित देख कर पत्नी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वहीं, दोनों बेटे भी पिता के गले लगकर फूट-फूट कर रो पड़े। परिजनों ने बताया कि पूरा परिवार उसे खोज-खोज कर थक गया था। परिजनों ने सोच लिया था कि वो किसी हादसे का शिकार हो गया है, लेकिन अब उसे जिंदा देखकर वो बेहद खुश हैं।

फूट-फूट कर रोए बेटे

मनोहर को पांवटा साहिब पुलिस थाने में उसके परिवार को सुपुर्द किया गया। परिवार ने संजय और पुलिस का खूब आभार प्रकट किया। यह घटना पुलिस और समाज के संयुक्त प्रयासों की एक प्रेरणादायक मिसाल है। विदित रहे कि, सिरमौर से ऐसे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं- जब स्थानीय लोगों और पुलिस प्रशासन ने मिलकर परिवार से बिछड़े हुए व्यक्ति को परिवार से मिलवाया है।

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