धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान आज सदन में तीखी नोकझोंक, आरोप-प्रत्यारोप और रिकॉर्ड से शब्द हटाने की मांगों ने माहौल को गर्मा दिया। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा एक मुद्दे पर बोलते हुए विषय से हटकर की गई टिप्पणी ने पूरे सत्र को विवादों में घेर दिया। जिस पर विपक्ष ने कड़ा रुख अपनाया।
सीएम सुक्खू की अपील
इस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि मंत्री के उन सभी बयानों को रिकॉर्ड से हटाया जाएगा जो विषय से असंबंधित हैं या आपत्तिजनक माने गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अब सदन परिसर में किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन से पहले विधानसभा सचिवालय को इसकी जानकारी देनी होगी और अनुमति आवश्यक होगी, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
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वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी मामले पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रश्नकाल के दौरान सदन में विभिन्न विषय उठाना एक अनुचित परंपरा बनता जा रहा है, जिसे रोकना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजस्व मंत्री के बयान पर आपत्ति जताई गई है, लेकिन कई बार सदन में राजनीतिक आरोपों के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियाँ भी की जाती हैं जिन्हें हटाया जाना चाहिए।
विपक्ष की मंत्री से माफी की मांग
सीएम ने तिरंगे के अपमान के आरोपों को भी सिरे से नकारते हुए कहा "इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने तिरंगे की रक्षा के लिए बलिदान दिया है। ऐसे में यह कहना कि हम राष्ट्रध्वज का अपमान करते हैं, बिल्कुल गलत है।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सदन की कार्यवाही आपसी सहमति, सम्मान और संवाद से चलनी चाहिए।
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इससे पहले प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही सुबह 11:26 बजे स्थगित करनी पड़ी थी। दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष के कई विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। शून्यकाल से ठीक पहले विपक्ष ने अपनी बात रखने की अनुमति मांगी, जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सभी विपक्षी विधायकों के साथ सदन में पहुंचे।
मंत्री की टिप्पणी सदन की मर्यादा के खिलाफ
जयराम ठाकुर ने कहा कि पंचायत चुनावों पर स्थगन प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन राजस्व मंत्री ने मुद्दे से हटकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संबंध में अपमानजनक टिप्पणी कर दी, जो सदन की मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने कहा "जिस राज्य का उदाहरण दिया गया है, वहां झूठे मामले दर्ज होने की बातें भी सामने आती हैं।
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ऐसे में मंत्री किस आधार पर विवादित मुद्दे को रिकॉर्ड में शामिल कर रहे हैं?" नेता प्रतिपक्ष ने मंत्री के शब्दों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग के साथ-साथ उनसे सदन और संगठन के प्रति की गई टिप्पणी पर माफी मांगने की भी बात कही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व कर्मचारियों के समर्थन में दिए जा रहे धरने के दौरान सत्ता पक्ष के विधायक उसी स्थान पर पहुंच गए, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी।
सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया
संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सदन में दोनों पक्ष कई बार मुद्दे से हटकर टिप्पणी करते हैं और एक-दूसरे के संगठनों पर आरोप लगाते हैं। ऐसे में केवल एकपक्षीय कार्रवाई ठीक नहीं। वहीं, भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने राजस्व मंत्री के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अनुचित टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जाए और मंत्री को सदन में माफी मांगनी चाहिए।
