शिमला/नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की इकलौती राज्यसभा सीट के लिए बिसात बिछ चुकी है। शिमला की सर्द हवाओं के बीच प्रदेश की राजनीति का पारा उस वक्त गरमा गया जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू रविवार को अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए। मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल एक प्रत्याशी के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे हिमाचल कांग्रेस के भीतर बड़े राजनीतिक फेरबदल के संकेत छिपे हैं।

हाईकमान के सामने सात चेहरों की फाइल

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुक्खू ने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठक में सात प्रमुख नामों पर विस्तार से चर्चा की है। इन नामों में क्षेत्रीय संतुलन और राष्ट्रीय कद दोनों का मिश्रण है। वहीं कैबिनेट मंत्री को राज्यसभा भेजने पर कैबिनेट में किसे मौका मिलेगा, इस पर भी सीएम सुक्खू ने हाईकमान से चर्चा की है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व इस बार राजनीतिक संतुलन, संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार तय करना चाहता है, ताकि पिछली बार जैसी राजनीतिक परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों।

 

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इन नामों पर चर्चा

  • आनंद शर्मा: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कद्दावर नेता।
  • रजनी पाटिल: प्रदेश प्रभारी और संगठन पर पकड़।
  • पवन खेड़ा: पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली में मजबूत पैठ।
  • प्रतिभा सिंह: सांसद एवं प्रदेशाध्यक्ष, जिनका नाम क्षेत्रीय भावनाओं से जुड़ा है।
  • कौल सिंह ठाकुर: अनुभवी नेता और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष।
  • गोकुल बुटेल: मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (IT), जो युवा चेहरे के तौर पर चर्चा में हैं।
    स्वास्थ्य मत्री धनी राम शांडिल के नाम भी राज्यसभा सीट के लिए चर्चा हो रही है।

कैबिनेट में बड़े बदलाव की आहट

इस बैठक का सबसे दिलचस्प पहलू मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल से जुड़ा है। दिल्ली के गलियारों में चर्चा है कि यदि मुख्यमंत्री अपने किसी मौजूदा कैबिनेट मंत्री को राज्यसभा भेजने में सफल रहते हैं, तो प्रदेश सरकार में रिक्तियां पैदा होंगी। यह कदम एक तीर से दो निशाने जैसा होगा। इससे न केवल हाईकमान को संतुष्ट किया जा सकेगा] बल्कि कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल कर क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने का सुनहरा मौका भी मिलेगा।

 

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जोखिम लेने के मूड में नहीं कांग्रेस

पिछले राज्यसभा चुनाव के दौरान बने राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए कांग्रेस इस बार कोई चूक नहीं करना चाहती। यही वजह है कि उम्मीदवार चयन से पहले विधायकों की राय] क्षेत्रीय संतुलन और पार्टी संगठन की मजबूती जैसे सभी पहलुओं पर गहन विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने हाईकमान को प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों से अवगत करवाते हुए स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व का होगा और उसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया जाएगा।

 

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नामांकन की समयसीमा ने बढ़ाई हलचल

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित होने के कारण कांग्रेस जल्द ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर सकती है। वहीं विपक्ष फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कांग्रेस के फैसले के बाद ही अपनी रणनीति तय करने की तैयारी में है।

भाजपा की "वेट एंड वॉच" नीति और बाहरी का मुद्दा

पिछली बार के राज्यसभा चुनाव के कड़वे अनुभवों से सबक लेते हुए कांग्रेस इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। उधर] विपक्षी दल भाजपा ने अपनी निगाहें कांग्रेस के फैसले पर टिका रखी हैं। यदि कांग्रेस किसी बाहरी चेहरे को तरजीह देती है] तो भाजपा इसे हिमाचल के स्वाभिमान से जोड़कर अपना प्रत्याशी उतार सकती है] जिससे मुकाबला रोचक होने की संभावना है।

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केंद्र से वित्तीय मुद्दों पर भी चर्चा संभव

राजनीति के साथ-साथ मुख्यमंत्री राज्य के आर्थिक हितों को भी साधने की कोशिश में हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री सुक्खू की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात प्रस्तावित है। इस बैठक में RDG (Revenue Deficit Grant) की बहाली और हिमाचल की लंबित परियोजनाओं पर चर्चा होगी। पिछली बार समय न मिल पाने के कारण यह मुलाकात टल गई थी, लेकिन इस बार सीएम प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर कड़ा पक्ष रख सकते हैं।

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