शिमला। आज से शुरु होने वाला हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र इस बार बेहद हंगामेदार रहने वाला है। एक तरफ सरकार आपदा से हुए भारी नुकसान और केंद्र से अब तक न मिली विशेष आर्थिक मदद का मुद्दा उठाएगी, तो दूसरी ओर विपक्ष इस पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू खुद सदन में यह बताएंगे कि प्रदेश ने अपने स्तर पर क्या कदम उठाए हैं और अब तक केंद्र से कोई राहत क्यों नहीं मिली।

पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

प्रदेश सरकार का कहना है कि आपदा प्रभावितों की मदद के लिए उसने अपने संसाधनों में राहत कार्य किए हैं। दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से कई बार मदद मांगी, लेकिन अभी तक कोई विशेष पैकेज नहीं मिला। केंद्र की ओर से सिर्फ दो टीमें भेजी गई थीं, जिनकी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है। बावजूद इसके अब तक न कोई घोषणा हुई और न ही जमीन पर मदद आई। इस मुद्दे को सदन में प्रस्ताव के जरिए फिर से उठाया जाएगा।

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विपक्ष की रणनीति

विपक्षी दल भाजपा मुश्किल में है क्योंकि केंद्र में उसकी ही सरकार है। ऐसे में कांग्रेस इस मुद्दे को जोरदार ढंग से सदन में रखने की तैयारी कर रही है। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर भी प्रधानमंत्री से मिल चुके हैं और हिमाचल की स्थिति से अवगत करा चुके हैं, लेकिन राहत पैकेज की घोषणा न होने से भाजपा को असहज सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

वन भूमि और पुनर्वास का सवाल

आपदा प्रभावितों के पुनर्वास के लिए सरकार के पास पर्याप्त सरकारी भूमि नहीं है। इस कारण उसने केंद्र से वन भूमि देने की मांग की है। मगर इस दिशा में भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विधानसभा में इस पर भी जोरदार बहस होना तय है।

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चांसलर की शक्तियां खत्म करने का विधेयक

सत्र में सरकार दो विश्वविद्यालयों में चांसलर की शक्तियां खत्म करने के लिए संशोधन विधेयक लाने जा रही है। यह वही मुद्दा है जिस पर पहले से ही राजभवन और सरकार आमने-सामने हैं। अब यह देखना होगा कि सदन में इस पर किस तरह से चर्चा होती है और सरकार इसे पारित कराने में कितनी सफल रहती है।

नशे और नकल पर सख्ती

सरकार नशा रोकने और नकल करवाने वालों पर लगाम लगाने के लिए भी कड़े विधेयक लाने की तैयारी में है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इन मुद्दों पर खास रणनीति बनाई जाएगी ताकि विपक्ष को बैकफुट पर धकेला जा सके।

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कांग्रेस विधायक दल की बैठक

कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी आज होने जा रही है, जिसमें तय होगा कि किन मुद्दों पर विपक्ष को घेरा जाएगा और किन विधेयकों को कैसे सदन में रखा जाएगा। इस बैठक में विधायकों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

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