शिमला। दिल्ली से लौटने और केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद आखिरकार हिमाचल प्रदेश के बजट की तारीख सामने आ गई है। CM सुखविंदर सिंह सुक्खू 20 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना चौथा बजट पेश करेंगे। ऐसे समय में जब प्रदेश आर्थिक दबाव से गुजर रहा है, यह बजट सरकार की नीतिगत दिशा और वित्तीय प्रबंधन की परीक्षा माना जा रहा है।
18 मार्च से दोबारा शुरू होगा सत्र
विधानसभा का बजट सत्र ब्रेक के बाद 18 मार्च से फिर शुरू होगा। पहले दो दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी। चर्चा पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री जवाब देंगे। इसके बाद 20 मार्च को बजट पेश किया जाएगा, जिस पर चार दिन तक विस्तार से बहस होगी। सत्र के 30 मार्च को समाप्त होने की संभावना है। इससे पहले बजट सत्र की शुरुआत 16 फरवरी को हुई थी।
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पिछले तीन बजट 50 हजार करोड़ से ऊपर
CM सुक्खू द्वारा पेश किए गए पिछले तीनों बजट का आकार 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक रहा है। वर्ष 2023-24 का बजट 53,413 करोड़ रुपए, 2024-25 का 58,444 करोड़ रुपए और 2025-26 का 58,514 करोड़ रुपए रहा। इस बार राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने से वित्तीय दबाव बढ़ा है, ऐसे में बजट आकार पिछले साल के आसपास रहने की संभावना जताई जा रही है।
आर्थिक संकट के बीच चुनौतियां
बता दें कि हिमाचल इस समय बढ़ते कर्ज, सीमित संसाधनों और केंद्र से मिलने वाली अनुदान राशि में कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। कर्मचारियों की देनदारियां, पेंशन भार, आपदा पुनर्वास खर्च और विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आर्थिक संतुलन की रणनीति भी होगा।
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हिमाचल को क्या अपेक्षा?
प्रदेश के लोगों को इस बजट से रोजगार सृजन, पर्यटन और बागवानी क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज, आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास, सड़क और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती, तथा युवाओं के लिए नई योजनाओं की उम्मीद है। कर्मचारी वर्ग महंगाई राहत और लंबित देनदारियों पर स्पष्ट रोडमैप चाहता है। वहीं आम जनता बिजली-पानी दरों और करों में राहत की आस लगाए बैठी है।
पक्ष-विपक्ष की रणनीति तेज
ब्रेक के बाद शुरू होने वाले सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों रणनीति तैयार करेंगे। विधायक दलों की बैठकों में मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया भी सत्र की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। अब नजर 20 मार्च पर है। आर्थिक दबाव के दौर में पेश होने वाला यह बजट तय करेगा कि सरकार वित्तीय संतुलन और विकास के बीच किस तरह का रास्ता चुनती है।
