शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण इस बार काफी गर्म रहने के संकेत दे रहा है। सदन में सवालों की ऐसी सुनामी आने वाली है, जिसमें करीब 800 प्रश्नों के जरिए सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाएगा। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कई विधायक भी अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में हैं। ऐसे में बजट सत्र के दूसरे चरण में जोरदार बहस और तीखे सवाल-जवाब देखने को मिल सकते हैं।
सड़कों, पानी और बिजली को लेकर सरकार पर निशाना
विधानसभा सचिवालय को अब तक करीब 800 प्रश्न प्राप्त हो चुके हैं। इनमें सबसे अधिक सवाल प्रदेश की खराब सड़कों, पेयजल संकट और बिजली आपूर्ति से जुड़े हैं। कई विधायकों ने पूछा है कि मरम्मत और निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई क्षेत्रों की सड़कें अब भी गड्ढों में क्यों तब्दील हैं।
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वहीं ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। कई स्थानों पर पाइपलाइन और नल तो लगाए गए हैं, लेकिन लोगों तक पानी नहीं पहुंच रहा। बिजली की बढ़ती दरों और कई क्षेत्रों में होने वाली कटौती को लेकर भी सरकार को सदन में जवाब देना पड़ सकता है। इन मुद्दों पर विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी सवाल उठाने की तैयारी कर चुके हैं।
बेरोजगारी और खाली पदों पर भी होगी चर्चा
बजट सत्र के दौरान युवाओं के रोजगार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठने वाला है। शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों को लेकर कई प्रश्न लगाए गए हैं। विधायकों का कहना है कि चुनाव के समय रोजगार को लेकर जो वादे किए गए थे, उनकी स्थिति क्या है और अब तक कितनी भर्तियां हुई हैं। इन सवालों के चलते मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनकी सरकार को सदन में कई अहम मुद्दों पर जवाब देना पड़ सकता है।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विशेष तैयारियां
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्र को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। सचिवालय द्वारा प्राप्त सभी प्रश्न संबंधित विभागों को भेज दिए गए हैं ताकि समय पर उत्तर तैयार किए जा सकें। सत्र के दौरान सुरक्षा के लिहाज से विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष इंतजाम किए जाएंगे।
13 बैठकों में तय होगी बजट की दिशा
विधानसभा का यह चरण 18 मार्च से शुरू होकर तीन अप्रैल तक चलेगा। इस अवधि में कुल 13 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी और उसके बाद मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सदन में राज्य का बजट प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद बजट पर विस्तृत चर्चा, कटौती प्रस्ताव और मतदान की प्रक्रिया के माध्यम से इसे पारित किया जाएगा।
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घमासान की पूरी संभावना
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बड़ी संख्या में लगाए गए सवालों के कारण इस बार विधानसभा में बहस का स्तर काफी तीखा रह सकता है। जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने नजर आ सकते हैं। ऐसे में बजट सत्र के दूसरे चरण में सदन के भीतर जोरदार राजनीतिक घमासान देखने की पूरी संभावना है।
