शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हरित विकास की दिशा में एक बड़ी पहल सामने आई है, जहां धरेच ग्राम पंचायत अब सौर ऊर्जा के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ गई है। यहां स्थापित 500 किलोवाट की सोलर परियोजना से बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है, जिससे पंचायत को हर साल करीब 28 लाख रुपये की आय होगी। यह पहल न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक नया मॉडल भी पेश करेगी।
सालाना उत्पादन का अनुमान करीब 8 लाख यूनिट
दरअसल, जिला शिमला की धरेच ग्राम पंचायत प्रदेश की पहली “ग्रीन पंचायत” बनकर उभरी है। यहां 500 किलोवाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना ने सफलतापूर्वक बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है, जो हिमाचल में ग्रामीण ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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इस परियोजना का उद्घाटन सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने कसुम्पटी दौरे के दौरान किया। करीब 1.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट जनवरी 2025 में शुरू हुआ था और मार्च 2026 के अंत तक इसे ग्रिड से जोड़ दिया गया। अब यह प्रतिदिन लगभग 3000 यूनिट स्वच्छ ऊर्जा पैदा कर रहा है, जबकि सालाना उत्पादन करीब 8 लाख यूनिट रहने का अनुमान है।
3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिकेगी बिजली
इस परियोजना के तहत उत्पादित बिजली को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा 3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदा जाएगा। इससे पंचायत को हर साल लगभग 28 लाख रुपये की आय होगी, जो ग्रामीण विकास के लिए एक स्थायी आर्थिक स्रोत बनेगी।
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मुख्यमंत्री ने इसे एक समावेशी और जनहितकारी मॉडल बताते हुए कहा कि इससे पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। परियोजना से होने वाली आय का एक हिस्सा गांव के विकास कार्यों, समाज के कमजोर वर्गों जैसे अनाथों और विधवाओं के कल्याण, और संचालन व रखरखाव पर खर्च किया जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
करीब 25 वर्षों की आयु वाली यह सौर परियोजना न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। इससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है और यह पहल हिमाचल में सतत विकास की दिशा में एक उदाहरण बन सकती है।
