रिकांगपिओ। हिमाचल प्रदेश में सितंबर के अंत में जहां मानसून की विदाई होती है, वहीं पहाड़ों पर बर्फ के फाहे गिर रहे हैं। मानसून ने विदाई से पहले लोगों को सर्दियों के कपड़े पहनने पर मजबूर कर दिया है। प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण जहां एक ओर किसान-बागवानों को दिक्कत का सामना करना पड़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्लेशियर गिरने से आम लोगों और भेड़पालकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
किन्नौर में भारी बर्फबारी
जनजातीय जिला किन्नौर में मौसम ने अचानक करवट ली है। ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार दूसरे दिन भी बर्फबारी जारी है, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हो रही है। छितकुल के रानी कंडा क्षेत्र में भारी बर्फबारी के बीच ग्लेशियर आने से सड़क बंद हो गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी तरह के जानी नुकसान की सूचना नहीं है।
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सड़क पर आया बर्फ का पहाड़, आवाजाही बंद
लगातार हो रही बर्फबारी के बीच छितकुल-दुमती सीमावर्ती मार्ग पर ग्लेशियर आ गया। इसके चलते सड़क पूरी तरह बंद हो गई है और सीमावर्ती क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन और संबंधित विभाग हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
सड़कों पर भारी फिसलन
छितकुल क्षेत्र में करीब 4 से 6 इंच तक बर्फबारी होने की सूचना है, जबकि कूनो चारंग में करीब 10 इंच तक बर्फ पड़ चुकी है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बर्फ जमा होने से सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं और लोगों की आवाजाही भी मुश्किल हो रही है।
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बर्फबारी में फंसे भेड़पालक
मौसम बिगड़ने का असर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौजूद भेड़पालकों पर भी पड़ा है। लगातार बर्फ गिरने के कारण कुछ भेड़पालक रास्तों में फंस गए हैं और भारी बर्फ के चलते निचले इलाकों की ओर वापस नहीं आ पा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि खराब मौसम के बीच कुछ पशुधन के मरने की सूचना भी सामने आई है। ऐसे में भेड़पालकों के सामने अपने पशुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है।
अचानक बढ़ी ठंड, जनजीवन प्रभावित
किन्नौर में मौसम के अचानक बदले मिजाज से सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। ऊंचाई वाले इलाकों में सीजन की पहली बर्फबारी के बाद तापमान में तेजी से गिरावट आई है। ठंड बढ़ने के साथ लोगों ने गर्म कपड़ों और हीटर जैसे साधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
पहाड़ों पर सफेद चादर बिछने से जहां मौसम ने सर्दी का एहसास बढ़ा दिया है, वहीं लगातार बर्फबारी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
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कूनो चारंग में बिजली गुल
बर्फबारी के बीच कूनो चारंग क्षेत्र में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई है। पिछले दिन से बिजली न होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खराब मौसम और बर्फबारी के बीच बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मौसम में सुधार के बाद बिजली आपूर्ति बहाल करने और प्रभावित मार्गों को खोलने का काम तेजी से किया जाएगा।
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सेब की तुड़ाई पर भी मौसम की मार
किन्नौर में मौसम का बदला मिजाज बागवानों के लिए भी चिंता का कारण बन गया है। कल्पा और पूह विकास खंडों में इन दिनों सेब तुड़ाई का काम चल रहा है। कई बागवान तैयार फसल को मंडियों तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं, लेकिन बारिश और बर्फबारी के कारण यह काम प्रभावित हो रहा है।
बागवानों को चिंता है कि अगर मौसम इसी तरह खराब रहा और तापमान में और गिरावट आई तो पेड़ों पर मौजूद सेब की फसल को नुकसान हो सकता है। वहीं सड़क बंद होने की वजह से तैयार फसल को समय पर मंडियों तक पहुंचाना भी चुनौती बन सकता है।
पहली बर्फबारी ने दिखाया सर्दी का असर
किन्नौर में सीजन की पहली बर्फबारी ने पहाड़ों पर सर्दी की दस्तक को तेज कर दिया है। एक ओर ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का दौर जारी है, तो दूसरी ओर निचले क्षेत्रों में बारिश से तापमान गिर रहा है। ग्लेशियर आने और सड़क बंद होने की घटनाओं के बाद प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही बहाल करना बड़ी चुनौती है।
फिलहाल जिले में लोगों को मौसम को देखते हुए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।
