शिमला। पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर अक्सर परिवारों में बेटियों के अधिकार पर सवाल खड़े किए जाते हैं। मगर अब हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर एक अहम कानूनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
पिता की जमीन पर बेटियों का भी पूरा हक
अदालत ने कहा है कि पैतृक संपत्ति में बेटी का अधिकार बेटे से किसी भी तरह कम नहीं है। बेटी जन्म से ही पैतृक संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार होती है और केवल इस आधार पर उसका हक खत्म नहीं किया जा सकता कि कानून में संशोधन के समय उसके पिता जीवित थे या नहीं।
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बेटियों का संपत्ति पर बराबर अधिकार
यह फैसला ऊना जिले से जुड़े संपत्ति विवाद में आया है। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने मामले में दायर अपील को खारिज करते हुए बेटियों के पैतृक संपत्ति में बराबर अधिकार को स्पष्ट किया। मामला करतार चंद की संपत्ति से जुड़ा था, जिनकी बिना वसीयत बनाए मृत्यु हो गई थी।
पिता की मौत के बाद बेटे ने अपने नाम करवाई जमीन
मामले के अनुसार, करतार चंद की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति को लेकर विवाद खड़ा हुआ। आरोप था कि उनके बेटे रोशन लाल ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से जमीन का इंतकाल अपने नाम करवा लिया। इसके बाद संपत्ति में बेटियों के अधिकार को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा।
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मामले की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम के प्रावधान पुराने मामलों पर लागू नहीं किए जा सकते। इसी आधार पर बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का हिस्सा देने का विरोध किया गया।
हाईकोर्ट ने खारिज की दलील
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू उत्तराधिकार कानून में हुए संशोधन के बाद बेटी को बेटे के समान अधिकार प्राप्त है। बेटी को पैतृक संपत्ति में अधिकार जन्म से ही मिलता है।
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HC का बड़ा फैसला
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 9 सितंबर 2005 को हिंदू उत्तराधिकार कानून में संशोधन लागू होने के समय पिता का जीवित होना जरूरी शर्त नहीं है। यानी केवल पिता की मृत्यु पहले हो जाने के आधार पर बेटी को पैतृक संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
बेटियों के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी
अदालत के इस फैसले ने पैतृक संपत्ति में बेटियों के अधिकार को लेकर स्थिति और स्पष्ट कर दी है। कोर्ट ने माना कि बेटी को बेटे के समान कानूनी दर्जा प्राप्त है और पैतृक संपत्ति में उसका अधिकार केवल इसलिए खत्म नहीं हो जाता कि परिवार में संपत्ति का इंतकाल किसी एक बेटे के नाम कर दिया गया हो। हाईकोर्ट ने मामले में अपीलकर्ता की अपील खारिज कर दी। इस फैसले को पैतृक संपत्ति में बेटियों के समान अधिकार से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
