शिमला। हिमाचल प्रदेश में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के खराब नतीजों को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। खराब रिजल्ट देने वाले 123 शिक्षकों पर कार्रवाई की तैयारी है, जिनमें 7 स्कूल प्रमुख भी शामिल हैं। विभाग ने संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब शिक्षकों के जवाब मिलने के बाद विभाग तय करेगा कि किस पर इंक्रीमेंट रोकी जाएगी और किसकी ACR में खराब प्रदर्शन दर्ज किया जाएगा।
किन शिक्षकों पर हो सकती है कार्रवाई
इस सूची में चार प्रधानाचार्य शामिल हैं, जिनमें एक आफिशिएटिंग प्रधानाचार्य भी हैं। इसके अलावा तीन मुख्य अध्यापक, 19 प्रवक्ता और 66 TGT शामिल हैं। 22 TGT और एक प्रवक्ता अनुबंध आधार पर काम कर रहे हैं। वहीं, आठ SMC शिक्षक भी इस सूची में हैं, जिनमें दो TGT और छह प्रवक्ता हैं।
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प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापकों की ACR में दर्ज होगी खराब परफॉर्मेंस
प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट यानी ACR में खराब प्रदर्शन दर्ज किया जा सकता है। वहीं, अन्य शिक्षकों की एक साल की इंक्रीमेंट रोकने का प्रावधान है। एसएमसी शिक्षकों पर भी कार्रवाई हो सकती है। ACR में खराब रिपोर्ट दर्ज होने से प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापकों की आगे प्रमोशन की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
शिक्षा मंत्री ने दिए थे कार्रवाई के निर्देश
खराब रिजल्ट को लेकर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। इसी के बाद विभाग ने संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी किए हैं।
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50 प्रतिशत से कम रिजल्ट पर शिक्षक कार्रवाई के दायरे में
विभाग ने कार्रवाई के लिए एक तय नियम बनाया है। अगर किसी शिक्षक के विषय का रिजल्ट 50 प्रतिशत से कम रहता है तो उस शिक्षक पर कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक के मामले में स्कूल का कुल रिजल्ट 25 प्रतिशत से कम होने पर कार्रवाई का प्रावधान है। यानी अगर स्कूल के 25 प्रतिशत विद्यार्थी भी पास नहीं हो पाए तो प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक से जवाब मांगा जा सकता है।
पिछले साल 109 शिक्षकों की रोकी गई थी इंक्रीमेंट
पिछले साल भी खराब रिजल्ट देने वाले 139 शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 109 शिक्षकों की इंक्रीमेंट रोक दी गई थी, जबकि करीब 14 शिक्षकों की ACR में खराब प्रविष्टि की गई थी। कुछ शिक्षकों के जवाब संतोषजनक पाए गए, इसलिए उन पर कार्रवाई नहीं हुई।
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प्रधानाचार्य की एक साल की इंक्रीमेंट करीब 4500 रुपये होती है। वहीं, अन्य श्रेणियों के शिक्षकों की इंक्रीमेंट करीब 2500 से 3500 रुपये तक होती है। शिक्षक की श्रेणी और वेतन के हिसाब से इंक्रीमेंट की राशि अलग-अलग होती है।
अब स्कूलों में जाकर जांच करेंगे उपनिदेशक
विभाग अब यह भी पता लगाएगा कि स्कूलों का रिजल्ट खराब क्यों रहा। इसके लिए संबंधित जिलों के उपनिदेशक स्कूलों का दौरा करेंगे। वे शिक्षकों और विद्यार्थियों से बातचीत कर खराब रिजल्ट के कारणों की जानकारी लेंगे। इसके बाद पूरी रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी।
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अगले महीने होगी रिपोर्ट की समीक्षा
उपनिदेशकों की ओर से तैयार की जाने वाली रिपोर्ट पर अगले महीने होने वाली समीक्षा बैठक में चर्चा होगी। इसके बाद विभाग यह तय करेगा कि खराब रिजल्ट के लिए जिम्मेदार शिक्षकों पर आगे किस तरह की कार्रवाई की जाए।
