शिमला। हिमाचल प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब दूसरे राज्यों से रेत और बजरी लेकर प्रदेश में प्रवेश करने वाले वाहनों को चेक पोस्ट पर शुल्क देना होगा।
हिमाचल में पंजाब से रेत-बजरी लाना होगा महंगा
यानी अब हिमाचल के पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर आदि से भी रेत-बजरी लाने वाले वाहनों को शुल्क देना पड़ेगा। इस फैसले का उद्देश्य खनन गतिविधियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ पूरे सिस्टम में पारदर्शिता लाना है।
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एंट्री पर देना होगा टोल
राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह आदेश लागू किया गया है, जो हिमाचल प्रदेश लघु खनिज नियम, 2015 और खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत जारी हुआ है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अवैध रूप से हो रहे खनिज कारोबार पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।
कितना भरना पड़ेगा टोल?
अधिसूचना के मुताबिक, राज्य में प्रवेश करने वाले विभिन्न प्रकार के वाहनों के लिए अलग-अलग शुल्क तय किया गया है। यह शुल्क राज्य की सीमा पर स्थापित चेक पोस्ट के माध्यम से वसूला जाएगा। इसमें-
- ट्रैक्टर-ट्रॉली- 1000 रुपये
- छोटी गाड़ियां- 1000 रुपये
- सिंगल एक्सल गाड़ी- 1500 रुपये
- मल्टी एक्सल गाड़ी- 3000 रुपये
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सरकार को करोड़ों का फायदा
सरकार को इस फैसले से हर साल करीब 25 से 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि पड़ोसी Punjab पहले से ही हिमाचल से जाने वाले रेत-बजरी वाहनों पर इसी तरह का शुल्क वसूल रहा है। ऐसे में हिमाचल ने भी जवाबी कदम उठाते हुए अपने यहां आने वाले वाहनों पर यह व्यवस्था लागू कर दी है।
हर गाड़ी का होगा रिकॉर्ड
अधिसूचना में यह भी साफ किया गया है कि यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू होगा। चेक पोस्ट पर शुल्क जमा करने के बाद वाहन मालिक या चालक को एक कन्फर्मेशन रसीद दी जाएगी- जिससे परिवहन की निगरानी और रिकॉर्ड रखना आसान होगा।
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अवैध खनन पर लगेगी लगाम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से न केवल अवैध खनन पर अंकुश लगेगा, बल्कि खनिजों के आवागमन में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी राजस्व में भी इजाफा होगा। फिलहाल पंजाब से सोलन और बिलासपुर जैसे जिलों में रोजाना बड़ी संख्या में रेत-बजरी से लदे ट्रक प्रवेश करते हैं, जिन्हें अब इस नई व्यवस्था के तहत शुल्क देना अनिवार्य होगा।
