रामपुर बुशहर (शिमला): आज के आधुनिक और डिजिटल युग में इंटरनेट के बढ़ते चलन के बीच युवक-युवतियों में ऑनलाइन दोस्ती का क्रेज तेजी से बढ़ा है। लेकिन, सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे की गई यह दोस्ती कई बार मासूम लड़कियों के लिए जिंदगी भर का नासूर और बेहद भारी पड़ जाती है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला शिमला जिले के रामपुर बुशहर से सामने आया है। यहां फेसबुक पर हुई एक दोस्ती का अंजाम 10वीं की एक नाबालिग छात्रा के लिए बेहद खौफनाक रहा। हालांकि, अब इस मामले में अदालत ने दोषी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

फेसबुक पर 10वीं की छात्रा से की दोस्ती 

किन्नौर स्थित रामपुर की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (विशेष पोक्सो कोर्ट) ने 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा से दरिंदगी के चार साल पुराने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह पूरा मामला साल 2020 का है। पीड़ित नाबालिग लड़की उस समय 10वीं कक्षा में पढ़ती थी और अपना एसओएस (SOS) का पेपर देने के लिए रिकांगपिओ आई हुई थी। इसी दौरान 19 सितंबर 2020 को उसकी मुलाकात आरोपी संतोष कुमार (पुत्र छेरिंग, निवासी गांव व डाकघर पूह, जिला किन्नौर) से हुई। संतोष ने पहले ही फेसबुक के माध्यम से लड़की को अपने झूठे प्रेमजाल में फंसा रखा था। परीक्षा खत्म होते ही आरोपी ने पीड़िता को शादी का झांसा दिया और बहला-फुसलाकर अपनी गाड़ी में बिठाकर रामपुर ले आया।

 

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रात भर गेस्ट हाउस में लूटी आबरू

आरोपी संतोष कुमार नाबालिग को रामपुर के एक गेस्ट हाउस में ले गया। वहां शादी का झांसा देकर उसने नाबालिग पीड़िता की आबरू लूट ली और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। घिनौनी वारदात को अंजाम देने के बाद, अगले दिन आरोपी पीड़िता को वापस रिकांगपिओ की तरफ लाया और शौंगटौंग के पास सड़क पर यह कहकर लावारिस छोड़ दिया कि वह दो दिन बाद आकर उसे अपने साथ ले जाएगा।

 

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मेडिकल में हुई थी पुष्टि

घर पहुंचकर जब रोती हुई पीड़िता ने अपने साथ हुई इस दरिंदगी की आपबीती परिजनों को बताई, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों ने तुरंत पुलिस थाना रिकांगपिओ में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और मेडिकल जांच में नाबालिग से दुष्कर्म की स्पष्ट पुष्टि हुई, जिसके बाद आरोपी को दबोच लिया गया।

 

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आरोपी को सुनाई 10 साल की सजा

अदालत में मामले की पैरवी सरकार की तरफ से उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने पूरी मजबूती से की। मुकद्मे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस सबूत पेश किए और कुल 20 अहम गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को गहराई से परखने के बाद, माननीय विशेष पोक्सो कोर्ट ने आरोपी संतोष कुमार को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) की विभिन्न धाराओं के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और 7,000 रुपये जुर्माने की सख्त सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषी को अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

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