चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के प्रसिद्ध मिंधल माता मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले में अदालत ने करीब 13 साल बाद फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी चंबा की अदालत ने मंदिर की संपत्ति के गबन के मामले में मिंधल निवासी बुधि राम को दोषी करार दिया है।

पुजारी ही निकला चोर

उप जिला न्यायवादी नवीन कुमार के अनुसार, 19 जुलाई 2013 को सब मैनेजमेंट कमेटी मिंधल माता मंदिर की बैठक हुई थी। बैठक के दौरान बुधि राम ने पुजारी का चार्ज छोड़ने से इनकार कर दिया था।

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सोने का छत्र-गहने गायब

बाद में जब मंदिर का चार्ज दूसरे व्यक्ति को सौंपा गया तो मंदिर की संपत्ति की जांच के दौरान सोने का एक छत्र, सोने के दो आभूषण और 68 हजार रुपये की चढ़ावा राशि गायब मिली। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और मंदिर की संपत्ति से जुड़े सामान के गायब होने को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई।

तहसीलदार की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

मंदिर की संपत्ति गायब होने के मामले में तहसीलदार पांगी की ओर से 22 अगस्त 2013 को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने बुधि राम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर चालान अदालत में पेश किया। इसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई।

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15 गवाहों ने अदालत में दी गवाही

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 15 गवाह अदालत में पेश किए गए। अभियोजन ने मंदिर की संपत्ति के गबन से जुड़े आरोपों को साबित करने के लिए दस्तावेज और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे।

अदालत ने सुनाई कठोर सजा

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले से जुड़े साक्ष्यों पर विचार करने के बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी चंबा की अदालत ने बुधि राम को दोषी करार दिया।अदालत ने उसे एक वर्ष के साधारण कारावास के साथ 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मंदिर की संपत्ति से जुड़े इस मामले में अदालत के फैसले के बाद अब दोषी को सजा भुगतनी होगी।

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