शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ पुलिस ने अब तस्करों की कमाई पर सीधा प्रहार शुरू कर दिया है। शिमला पुलिस ने पंजाब से जुड़े एक बड़े नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 2.09 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की है। कार्रवाई में आरोपी की आधा दर्जन लग्जरी गाड़ियां, दो कमर्शियल प्रॉपर्टी, एक मकान और बैंक खातों में मौजूद रकम शामिल है। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि ये संपत्तियां कथित तौर पर नशे के कारोबार से अर्जित रकम से बनाई गई थीं।

चिट्टे की बरामदगी से खुला पंजाब तक फैला नेटवर्क

मामले की शुरुआत 20 जून 2026 को हुई, जब शिमला पुलिस के स्पेशल सेल ने कनलोग स्थित एक होम-स्टे में दबिश देकर बठिंडा निवासी गोपाल कुमार को करीब 16 ग्राम चिट्टा/हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान पुलिस को नशे की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली। जांच आगे बढ़ी तो मोहाली से गुरुवचन उर्फ गुरु को गिरफ्तार किया गया, जिसके कब्जे से पुलिस ने 162 ग्राम चिट्टा बरामद करने का दावा किया।

 

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जांच आगे बढ़ी तो सामने आया मुख्य संचालक

पुलिस ने तकनीकी जांच, वैज्ञानिक साक्ष्यों और मानवीय इनपुट के आधार पर बठिंडा निवासी दीपक कुमार उर्फ कर्णी बराड़ को इस नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया। इसके बाद शिमला पुलिस की टीम ने बठिंडा में संयुक्त कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं और वर्ष 2023 में उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था, जिसमें करीब 100 ग्राम नशीले पदार्थ की बरामदगी का उल्लेख है।

 

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बैंक खातों में 50 लाख से ज्यादा के ट्रांजैक्शन

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के आर्थिक लेनदेन की भी जांच शुरू की। वित्तीय पड़ताल में पिछले छह महीनों के दौरान उसके बैंक खाते में 50 लाख रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन सामने आने की बात पुलिस ने कही है। इसके बाद जांच का दायरा आरोपी की चल-अचल संपत्तियों तक पहुंचा। पुलिस ने करीब 2.09 करोड़ रुपये की संपत्ति चिन्हित की, जिसे नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्ति बताया गया है।

लग्जरी गाड़ियों से लेकर मकान और कमर्शियल प्रॉपर्टी फ्रीज

पुलिस की कार्रवाई में आरोपी से जुड़ी करीब आधा दर्जन लग्जरी गाड़ियां, दो कमर्शियल प्रॉपर्टी, एक मकान और बैंक खातों में मौजूद रकम शामिल है। इस कार्रवाई का उद्देश्य नशे के कारोबार से अर्जित कथित अवैध संपत्ति को सुरक्षित रखना और तस्करी से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर शिकंजा कसना है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि नशे से होने वाली कमाई को किन माध्यमों से संपत्तियों में बदला गया।

 

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2026 में नशा तस्करों की संपत्ति पर बढ़ी कार्रवाई

शिमला पुलिस के अनुसार वर्ष 2024 और 2025 में नशा तस्करों की अवैध संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई का आंकड़ा शून्य रहा था। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक करीब 6.38 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति पर कार्रवाई की जा चुकी है। मौजूदा मामले में 2.09 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज किया जाना इसी अभियान का हिस्सा है।

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अब नशे की कमाई पर भी पुलिस की नजर

शिमला पुलिस का रुख साफ है कि नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। तस्करी से अर्जित रकम से खरीदी गई संपत्तियों और दूसरे आर्थिक संसाधनों की भी जांच की जाएगी। इससे नशे के कारोबार को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, ताकि तस्करी से तैयार किया गया पूरा नेटवर्क प्रभावी ढंग से तोड़ा जा सके।

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