मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर में जयदेवी स्कूल की अध्यापिका आशिमा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब मृतका के मायका पक्ष ने पुलिस की मौजूदा जांच पर सवाल उठाते हुए उसकी मौत को आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया है। परिजनों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की नए सिरे से और निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग उठाई है।
हाथों में मोमबत्तियां लेकर सड़कों पर उतरे लोग
आशिमा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर वीरवार को सुंदरनगर में परिजनों के साथ स्थानीय लोगों, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर सच्चाई सामने लाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कैंडल मार्च की शुरुआत भोजपुर बाजार स्थित गोपाल मंदिर से हुई। यहां से लोग हाथों में मोमबत्तियां और बैनर लेकर महाराणा प्रताप चौक की ओर रवाना हुए।
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मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आशिमा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर नारे लगाए। लोगों ने "आशिमा को न्याय दो", "हमें न्याय चाहिए, कहानियां नहीं" और "दोषियों को कड़ी सजा दो" जैसे नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज करवाया। महाराणा प्रताप चौक पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने दो मिनट का मौन रखा और आशिमा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
साक्ष्यों की जांच को लेकर परिवार ने उठाए सवाल
कैंडल मार्च के बाद मृतका के पिता सुलेमान अंसारी के नेतृत्व में परिजनों ने सुंदरनगर के एसडीएम अमर नेगी के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन के जरिए परिवार ने मामले की जांच को लेकर अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखीं। परिजनों का आरोप है कि मामले की जांच में कुछ ऐसे पहलू हैं, जिन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि जब तक सभी परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच नहीं होती, तब तक मौत की वास्तविक वजह को लेकर कई सवाल बने रहेंगे।
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परिजनों ने जांच में कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने घटना के समय से संबंधित कथित विसंगतियों, फोरेंसिक जांच की प्रक्रिया, गवाहों के बयान और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की वैज्ञानिक जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए हर तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्य की बारीकी से जांच जरूरी है। इसी आधार पर उन्होंने पुलिस जांच की निगरानी और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए SIT गठित करने की मांग की है।
व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का समर्थन
मृतका के परिजनों ने कुछ सामान की कथित तौर पर बरामदगी न होने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। परिवार के मुताबिक आशिमा का बैग, आभूषण, घड़ी, स्कूल की चाबियां और अन्य सामान अब तक बरामद नहीं हुआ है। परिजनों ने मांग की है कि इन वस्तुओं का पता लगाया जाए और यह भी जांच की जाए कि घटना के बाद उनका इस्तेमाल, स्थानांतरण या गायब होना मामले की परिस्थितियों से किसी तरह जुड़ा है या नहीं।
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परिवार का कहना है कि ऐसे मामलों में छोटी से छोटी वस्तु भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, इसलिए सभी संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित कर उनकी वैज्ञानिक जांच की जानी चाहिए। आशिमा को न्याय दिलाने की मांग को सुंदरनगर के विभिन्न संगठनों का भी समर्थन मिला है। संयुक्त व्यापार संगठन सुंदरनगर, व्यापार मंडल और ह्यूमन राइट्स इंटरनैशनल फेडरेशन समेत स्थानीय लोगों ने कैंडल मार्च में भाग लेकर परिवार की मांगों का समर्थन किया।
चार आरोपी न्यायिक हिरासत में
समर्थन कर रहे संगठनों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द SIT गठित कर मामले की वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा। गौरतलब है कि आशिमा के भाई की शिकायत के आधार पर सुंदरनगर के बीएसएल कॉलोनी थाने में उसके ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
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पुलिस ने मामले में आशिमा के पति कासिम शेख, ससुर कर्मदीन शेख, सास राजबीबी और ननद काजिमा शेख को गिरफ्तार किया था। चारों आरोपी मंडी के सरकाघाट क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद न्यायालय ने चारों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है। अब आशिमा के मायका पक्ष ने सरकार के सामने स्पष्ट रूप से SIT जांच की मांग रखी है। परिवार का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि मामले की हर कड़ी की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच चाहिए।
सरकार को यह संदेश देने की कोशिश
कैंडल मार्च के जरिए परिजनों और समर्थकों ने सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि जब तक मौत से जुड़े सभी सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब तक उनकी न्याय की मांग जारी रहेगी। फिलहाल मामले में पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। दूसरी ओर, SIT गठन की मांग को लेकर परिवार और स्थानीय संगठनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं।
