बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स बिलासपुर के डॉक्टरों ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे प्रदेश के चिकित्सा इतिहास में एक नई मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। खेत में काम करते समय तेजधार दराट से लगभग पूरी तरह कट चुके एक व्यक्ति के हाथ को चिकित्सकों ने सात घंटे तक चली बेहद जटिल माइक्रो-सर्जरी के बाद सफलतापूर्वक जोड़ दिया। कटी हुई रक्तवाहिकाओं, नसों, टेंडन और हड्डियों की बारीकी से मरम्मत कर डॉक्टरों ने हाथ में दोबारा रक्त संचार बहाल करने में सफलता हासिल की।

शख्स का कट गया था हाथ

यह मामला कुल्लू जिले के एक व्यक्ति से जुड़ा है, जो खेतों में काम कर रहा था। काम के दौरान अचानक तेजधार दराट उसके हाथ पर जा लगा। वार इतना गंभीर था कि हाथ लगभग पूरी तरह कटकर अलग होने की स्थिति में पहुंच गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मरीज के हाथ से अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था और उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। परिजनों ने उसे तत्काल स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। कुल्लू अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे बिना समय गंवाए एम्स बिलासपुर रेफर कर दिया।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल : पहाड़ी से गिरा मलबा, चपेट में आईं कई बाइक-स्कूटी; तेज बारिश में स्कूल-कॉलेज बंद

एम्स में शुरू हुई हाथ बचाने की जंग

एम्स बिलासपुर पहुंचने के बाद डॉक्टरों की टीम ने स्थिति का तत्काल आकलन किया। मरीज को स्थिर करने के साथ ही चिकित्सकों ने ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी, क्योंकि ऐसे मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। हाथ की रक्तवाहिकाओं में रक्त प्रवाह लंबे समय तक बाधित रहने पर ऊतकों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसी चुनौती को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना देरी किए माइक्रो-सर्जरी का निर्णय लिया। इसके बाद ऑपरेशन थिएटर में शुरू हुआ कई घंटों तक चलने वाला बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन।

यह भी पढ़ें- हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला : तलाक के बाद भी हर महीने पति से पैसे ले सकती है पत्नी...

सात घंटे तक चली जटिल माइक्रो-सर्जरी

लगभग सात घंटे तक चले ऑपरेशन में डॉक्टरों की टीम ने एक-एक क्षतिग्रस्त संरचना को बेहद बारीकी से जोड़ा। केवल हड्डी को जोड़ना ही चुनौती नहीं थी, बल्कि हाथ की कटी हुई धमनियों, नसों और टेंडन को माइक्रो-सर्जिकल तकनीक से दोबारा जोड़ना सबसे कठिन चरण था।

यह भी पढ़ें- हिमाचल के 9 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट : नदी-नालों से रहें दूर, जानें मौसम अपडेट

चिकित्सकों ने हड्डियों को सही स्थिति में लाने के साथ-साथ कटी हुई रक्तवाहिकाओं की सूक्ष्म मरम्मत की। नसों और टेंडन को भी सावधानीपूर्वक जोड़ा गया, ताकि हाथ में रक्त संचार बहाल होने के साथ भविष्य में उसकी कार्यक्षमता वापस आने की संभावना बनी रहे। घंटों की मेहनत के बाद डॉक्टरों को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब हाथ में दोबारा रक्त प्रवाह बहाल हो गया।

हिमाचल के स्वास्थ्य क्षेत्र में रचा गया इतिहास

एम्स बिलासपुर की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हिमाचल प्रदेश में इस स्तर की माइक्रो-सर्जरी पहली बार सफलतापूर्वक की गई है। अब तक गंभीर दुर्घटनाओं में हाथ या शरीर के किसी अंग के लगभग पूरी तरह कट जाने के बाद मरीजों को कई बार प्रदेश से बाहर बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख करना पड़ता था। लेकिन एम्स बिलासपुर में हुई इस जटिल सर्जरी ने यह साबित किया है कि प्रदेश में भी अत्याधुनिक माइक्रो-सर्जरी और जटिल पुनर्निर्माण सर्जरी की क्षमता विकसित हो चुकी है। इसे हिमाचल के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : मायके गई थी आशा, पंजाब में ट्रेन की चपेट में आई- शाम को लौटना था घर

डॉ. नवनीत शर्मा के नेतृत्व में टीम ने संभाला मोर्चा

इस ऐतिहासिक ऑपरेशन का नेतृत्व एम्स बिलासपुर के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. नवनीत शर्मा ने किया। उनके साथ सर्जिकल टीम में डॉ. विनीत, डॉ. शिवानी, डॉ. हरलीन और डॉ. एश्वर्या शामिल रहीं। वहीं, इतनी लंबी और जटिल सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया टीम की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। डॉ. मार्कंडेय प्रसाद, डॉ. सचिन और जूनियर रेजिडेंट डॉ. हिमांशु ने एनेस्थीसिया से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।

डॉक्टरों ने बताया, कटे अंग को फेंके नहीं

इस सफलता के साथ डॉक्टरों ने लोगों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण चिकित्सीय संदेश भी दिया है। डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि दुर्घटना में यदि शरीर का कोई अंग कट जाए तो घबराने के बजाय उसे सुरक्षित रखना चाहिए और मरीज के साथ जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए। कटे हुए अंग को सीधे बर्फ पर रखने के बजाय उचित तरीके से सुरक्षित पैक करके अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। ऐसी स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और समय पर उपचार मिलने से अंग को दोबारा जोड़ने की संभावना बढ़ सकती है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें