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January 7, 2026

हिमाचल में दुनिया का इकलौता नागलोक मंदिर- जहां श्री राम अपने पूरे परिवार के साथ हैं विराजमान

मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है

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NAGLOK TEMPLE HIMACHAL SOLAN

सोलन। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में सैकड़ों प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं- जिनसे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। पहाड़ों की गोद में बसे ये मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, परंपरा और लोक विश्वास का केंद्र हैं। देवभूमि हिमाचल में देवी-देवता साक्षात वास करते हैं और हर सुख-दुख में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं मंदिर

मंदिरों से जुड़ी लोककथाएं, जागरण, मेलों और उत्सवों की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जो समाज को एक सूत्र में बांधती है। दूरदराज से श्रद्धालु यहां मन्नतें लेकर आते हैं और पूरी होने पर भेंट, चढ़ावा व पूजा-अर्चना कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। यही कारण है कि हिमाचल के मंदिर लोगों के जीवन, संस्कृति और विश्वास का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं।

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दुनिया का इकलौता नागलोक मंदिर

अगर आप नाग देवता को पूजते हैं तो हमारे हिमाचल का ये मंदिर आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। क्योंकि ये पूरी दुनिया का इकलौता नागलोक मंदिर है- जहां नागों के 8 कुल और 26 जातियों समेत नाग कुल की महारानी शेषनाग माता भी विराजती हैं। इस मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।

सवा करोड़ ईंटों से बनाया गया मंदिर

हम बात कर रहे हैं सोलन जिला में पड़ते नागलोक मंदिर की- जिसे रामलोक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह पूरा मंदिर सवा करोड़ ईंटों से बनाया गया है- जिसकी ऊंचाई करीब 451 फीट बताई जाती है।

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30 फीट गहरा तहखाना

सोलन जिले के साधुपुल क्षेत्र में स्थित इस नागलोक मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इससे जुड़ा 30 फीट गहरा तहखाना है। इस तहखाने की दीवारें करीब 5 फीट मोटी बनाई गई हैं और तय किया गया है कि इसे कभी खोला नहीं जाएगा।

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मंदिर का खजाना लोगों के लिए

यहां भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के सर्प और अन्य विशेष चढ़ावे सुरक्षित रखे जाते हैं और ये तय किया गया है कि जब प्रदेश या समाज पर कोई बड़ा संकट आएगा, तब यह खजाना जनहित में उपयोग होगा।

पूरे परिवार के साथ विराजमान है श्री राम

वहीं, इसी परिसर में प्रभु श्रीराम, माता सीता, हनुमान जी और अन्य देवी-देवताओं की अष्टधातु से बनी 11-11 फीट ऊंची मूर्तियां स्थापित हैं और पूरा श्री राम परिवार यहां स्थापित होने के कारण इसे मिनी अयोध्या भी कहा जाता है।

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450 किलो वजनी शिवलिंग

इसके अलावा परिसर में नवग्रह मंदिर, 450 किलो वजनी शिवलिंग और देवदार के वृक्षों पर स्थापित सप्तऋषि मंदिर भी मौजूद हैं। लेकिन इस पूरे रामलोक की सबसे अलग और विशिष्ट पहचान आज भी यही है- दुनिया का इकलौता नागलोक मंदिर। इस नागलोक मंदिर की स्थापना के लिए कलयुग में पहली बार विशेष सर्प महायज्ञ का आयोजन किया गया था।

सर्पराज तक्षक ने दिए दर्शन

मंदिर से जुड़े लोगों का दावा है कि इस यज्ञ के दौरान सर्पराज तक्षक ने स्वयं आकर दर्शन दिए। बताया जाता है कि यज्ञ के समय जिस स्थान पर तक्षक नाग जी की मूर्ति स्थापित की गई थी, वहीं करीब आठ फीट लंबा नाग प्रकट हुआ और कुछ समय तक वहीं मौजूद रहा।

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द्वापर युग में हुआ था सर्प महायज्ञ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इससे पहले ऐसा सर्प महायज्ञ द्वापर युग में हुआ था। उस समय पांडव वंशी राजा परीक्षित को सर्पराज तक्षक ने डंसा था, जिसके बाद उनके पुत्र राजा जन्मेजय ने सर्प महायज्ञ करवाया था। नागलोक मंदिर की स्थापना को उसी परंपरा से जोड़ा जाता है।

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