#धर्म
December 23, 2025
हिमाचल: मां की मूर्ति को लेकर आपस में भिड़े 2 जिले- देवी ने खुद लिया था फैसला, आज यहां है विराजित
खेतों की जुताई के दौरान मिला पत्थर
शेयर करें:

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में एक देवी का मंदिर हमीरपुर और मंडी जिलों के सीमा पर स्थित है। देवी के इस मंदिर के लिए 2 जिलों के लोग आपस में भिड़ गए थे लेकिन मां तो मां हैं। उन्होंने अपने हिसाब से फैसला लिया कि वे कहां स्थापित होना चाहती हैं।
पुजारी बताते हैं कि मंदिर के स्थान पर 2 परिवार काम करते थे। एक परिवार मंडी का था तो दूसरा हमीरपुर का। एक बार खेतों में जुताई करते वक्त हल एक पत्थर से टकरा गया और उस पत्थर से खून बहने लगा। ये देख सब हैरान हो गए और बात हर जगह आग की तरह फैल गई।
मां की इस पिंडी को बाहर निकाला गया। फिर मां ने दर्शन देकर अपने लिए स्थान मांगा। यहीं से दो जिलों का विवाद उपजा। मंडी के लोग कहने लगे कि ये पिंडी हमें मिली है इसलिए हम इसे अपने गांव में ले जाएंगे और वहीं इसकी स्थापना करेंगे।
वहीं हमीरपुर के लोग पिंडी की स्थापना अपने यहां करने के लिए अड़ गए। इसी बीच मंडी वालों ने मूर्ति उठाई और चल पड़े। जब वे अवाहदेवी के पास पहुंचे तो उन्होंने आराम करने के लिए पिंडी नीचे रख दी। जब वे उठे और आगे बढ़ने के लिए पिंडी को उठाने लगे तो पिंडी उठ ही नहीं पाई।
काफी मशक्कत के बाद भी पिंडी वहां से नहीं उठी। ऐसे में दोनों तरफ के लोग वहां इकट्ठा हो गए। बुजुर्गों ने फैसला लिया कि इस पिंडी को यहीं स्थापित किया जाए। दोनों परिवारों को पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी सौंपी गई जो आज तक जारी है।
कुछ इस तरह मां अवाह देवी की स्थापना हुई। वहीं अवाह देवी के नाम के पीछे भी रोचक कहानी है। कहते हैं इस स्थान पर बहुत तेज हवाएं चलती थी। कभी किसे के मुंह से अचानक निकला- वाह देवी - तब से यहां का नाम अवाह देवी पड़ गया।
समय बीतता गया और सन् 1965 में हरियाणा के अंबाला जिले के नन्नयोला गांव से महात्मा श्री सरवन नाथ जी यहां आए और यहां के मनोहारी दृश्य को देखकर यहीं तपस्या करने लगे। एक दिन मां ने उन्हें दर्शन देखकर कहा कि मेरा भवन यहां बनाओ और अपनी कुटिया भी यहीं बना लो।
स्थानीय लोगों के साथ मिलकर मंदिर का निर्माण करवाया गया। फिर मंदिर कमेटी बनाई गई। तब से आज तक इसकी देखरेख का जिम्मा पुजारियों और कमेटी के पास है। अवाह देवी पूर्व CM प्रेम कुमार धूमल की कुलदेवी भी हैं। जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने मंदिर का सौन्दर्यकर्ण करवाया।