#राजनीति
September 26, 2025
सुक्खू सरकार का व्यवस्था परिवर्तन: गैर जरूरी कह खत्म किए 327 सरकारी पद, बेरोजगारों को बड़ा झटका
एक लाख सरकारी नौकरी देने का वादा करने वाली सरकार खत्म कर रही सरकारी पद
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार चुनावी मंचों से एक लाख सरकारी नौकरियां देने का दावा करती रही है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। राज्य सरकार ने हिमाचल आवास एवं नगरीय विकास प्राधिकरण ;हिमुडाद्ध में बड़े पैमाने पर पदों को समाप्त कर बेरोजगार युवाओं को करारा झटका दिया है।
ताजा आदेशों के अनुसार हिमुडा में स्वीकृत कुल 633 पदों में से 327 पद खत्म कर दिए गए हैं। इनमें ज्यादातर छोटे कर्मचारियों के पद शामिल हैं, जिन्हें गैर जरूरी बताते हुए हटा दिया गया है। यह फैसला उन हजारों युवाओं के लिए बड़ा धक्का है, जो वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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हैरानी की बात यह है कि जहां छोटे कर्मचारियों की नौकरियों को गैर जरूरी बताया गया, वहीं उच्च अधिकारियों की सुविधा के लिए नई व्यवस्थाएं खड़ी की गई हैं। उदाहरण के तौर पर अब तक हिमुडा में एडवाइजर का कोई पद नहीं था, लेकिन हाल ही में इसे सृजित किया गया और इसके साथ 6 कर्मचारियों की तैनाती भी की गई।
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इसी तरह पहले हिमुडा में केवल एक चीफ इंजीनियर का पद था, लेकिन सरकार ने कुछ समय पूर्व ही दो पद बनाए ताकि वरिष्ठ इंजीनियरों को एडजस्ट किया जा सके। अब उन्हीं पदों को समाप्त कर दिया गया है और वरिष्ठ अधिकारियों को एडवाइजर बनाकर बैठा दिया गया है। इससे साफ है कि उच्च स्तर पर पद सृजन हो रहा है, जबकि निचले स्तर के कर्मचारी और बेरोजगार लगातार नुकसान उठा रहे हैं।
हिमुडा के पुनर्गठन में राजनीतिक रंग भी साफ नजर आ रहा है। सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन में स्थित डिवीजन को बंद कर दिया गया, जबकि विभागीय मंत्री राजेश धर्माणी के विधानसभा क्षेत्र बिलासपुर के घुमारवीं में नया डिवीजन खोल दिया गया है। इस कदम से क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक लाभ.हानि की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वर्तमान में हिमुडा में 352 पद भरे हुए हैं, जबकि 281 पद रिक्त थे। अब 327 पद खत्म होने से न केवल नए भर्ती के अवसर शून्य हो जाएंगे, बल्कि सेवारत कर्मचारियों की प्रमोशन चैनल भी रुक जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि अब उन्हें पदोन्नति पाने के लिए कई.कई साल इंतजार करना पड़ेगा। इसी कारण कर्मचारियों में सरकार और हिमुडा प्रबंधन के खिलाफ रोष पनप रहा है। अंदरखाते चर्चाएं हैं कि आने वाले दिनों में कर्मचारी एकजुट होकर इस निर्णय को चुनौती देने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
हिमुडा का मुख्य कार्य आवासीय कॉलोनियां और उनसे संबंधित बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। यह संस्था किफायती आवास और नई टाउनशिप विकसित करने में राज्य की अहम भूमिका निभाती रही है। इसके चेयरमैन शहरी विकास मंत्री होते हैं, जबकि वाइस चेयरमैन की नियुक्ति सरकार करती है। मौजूदा समय में मंत्री राजेश धर्माणी इसके चेयरमैन और यशवंत छाजटा वाइस चेयरमैन हैं।
सुक्खू सरकार जहां युवाओं को रोजगार देने के वादों को लेकर बड़े.बड़े ऐलान कर रही है, वहीं व्यवहार में सरकारी पदों को खत्म किया जा रहा है। 327 पदों की समाप्ति ने न केवल बेरोजगारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य को भी अनिश्चित बना दिया है। युवाओं और कर्मचारियों का कहना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो एक लाख नौकरियों का वादा केवल चुनावी जुमला बनकर रह जाएगा।