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August 16, 2025
शिमला में भारी लैंडस्लाइड, मलबे में दबी गाड़ियां- मौके पर पहुंची मशीन, राहत कार्य जारी
फोरलेन पर तीन जगह हुआ लैंडस्लाइड
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश अब बड़े पैमाने पर तबाही का सबब बनती जा रही है। बीती रात और शनिवार सुबह हुई भारी वर्षा ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। सबसे ज्यादा असर राष्ट्रीय महत्व वाले चंडीगढ़-मनाली फोरलेन और राजधानी शिमला में देखने को मिला।
मंडी जिले में चंडीगढ़-मनाली फोरलेन पर बीती रात से लगातार मलबा गिरने का सिलसिला जारी है। मंडी ओट, कैंची मोड़ और जोगनी माता क्षेत्र में भारी भूस्खलन हुआ, जिससे यह मार्ग तीन जगह अवरुद्ध हो गया। जोगनी नाले का पानी भी हाईवे पर बहने लगा, जिससे स्थिति और खतरनाक हो गई है।
वहीं, मंडी-कुल्लू को जोड़ने वाली वैकल्पिक सड़क वाया कटौला भी IIT कमांद के पास बंद पड़ी है। हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। कई यात्री रातभर अपनी गाड़ियों में ही फंसे रहे और अब सड़क खुलने का इंतजार कर रहे हैं। जेसीबी और प्रशासनिक टीमें लगातार मलबा हटाने का काम कर रही हैं, लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश राहत की राह में बाधा बन रही है।
राजधानी शिमला में भी सुबह के समय देवनगर क्षेत्र में भारी भूस्खलन हो गया। टीसीपी कार्यालय के पास पहाड़ी खिसकने से सड़क पर खड़ी 2 से अधिक गाड़ियां मलबे में दब गईं। इस घटना के बाद भट्टाकुफर-मैहली और आईएसबीटी रोड को आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पहाड़ी पर यह लैंडस्लाइड हुआ, उसके पीछे कई रिहायशी भवन बने हुए हैं। पहाड़ी के खिसकने के बाद अब उन इमारतों को भी खतरा मंडराने लगा है। नगर निगम और जिला प्रशासन ने तुरंत टीम भेजकर इलाके की जांच शुरू कर दी है। प्रभावित सड़क को खाली कराया गया है।
इधर, शिमला जिले के सुन्नी क्षेत्र में सतलुज नदी उफान पर है। तेज बहाव की चपेट में आने से एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल के टूटने से गांवों का संपर्क टूट गया है और लोगों को आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
लगातार हो रही बारिश और जगह-जगह लैंडस्लाइड के बाद प्रशासन ने यात्रियों और स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। जिला प्रशासन ने कहा है कि आने वाले दिनों में भी मौसम खराब रहने की संभावना है, ऐसे में लोग अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासनिक अलर्ट पर ध्यान दें।
लगातार बरसात से प्रदेश में सड़क नेटवर्क चरमराने के साथ-साथ जान-माल का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। लोगों में अब बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं को लेकर दहशत का माहौल है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले पांच से छह दिन तक प्रदेश में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। 21 अगस्त तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगातार वर्षा की संभावना जताई गई है।
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आज यानी 16 अगस्त को ऊना, कांगड़ा, चंबा और शिमला जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में कहीं-कहीं तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। 17 अगस्त को कांगड़ा, मंडी और शिमला में यलो अलर्ट रहेगा, जबकि 18 अगस्त को कांगड़ा और सिरमौर तथा 19 अगस्त को ऊना और कांगड़ा में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
शिमला जिला की स्थिति सबसे गंभीर है। यहां सामान्य से 82 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। लगातार वर्षा के कारण सेब और मक्की जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
लगातार बारिश और भूस्खलन से अब तक प्रदेश को भारी क्षति झेलनी पड़ी है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, इस मानसून में अब तक 2144 करोड़ रुपये से ज्यादा की सरकारी व निजी संपत्ति नष्ट हो चुकी है। 562 घर पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं। 1705 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
अब तक 257 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से 33 लोगों की मौत बाढ़, बादल फटने और लैंडस्लाइड जैसी घटनाओं में हुई है। इसके अलावा 37 लोग अभी तक लापता बताए जा रहे हैं।