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August 16, 2025

मणिमहेश यात्रा का आगाज : आज होगा शाही स्नान, गंदगी फैलाने पर सख्ती- कई नियम बदले

प्लास्टिक पर सख्ती और भक्तों के लिए नए नियम

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manimahesh yatra

चंबा। हिमाचल प्रदेश के पवित्र मणिमहेश यात्रा आज से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर छोटा शाही स्नान के साथ शुरू हुई यह यात्रा राधा-अष्टमी यानी 31 अगस्त तक चलेगी। हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए डल झील पहुंच रहे हैं। इस बार प्रशासन ने यात्रा को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं।

यात्रा में पहली बार प्लास्टिक पर डिपोजिट-रिफंड स्कीम

इस बार मणिमहेश यात्रा में गंदगी रोकने के लिए राज्य सरकार ने ‘डिपोजिट रिफंड स्कीम’ शुरू की है। इसके तहत श्रद्धालुओं को प्लास्टिक पैक्ड खाद्य सामग्री खरीदते समय 2, 5 और 10 रुपए अतिरिक्त चुकाने होंगे। चिप्स, नमकीन, चॉकलेट जैसे पैकेट पर 2 रुपए, पानी की बोतल पर 5 रुपए और मेटल बोतल में पैक सामान पर 10 रुपए अतिरिक्त देना होगा।

 

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श्रद्धालु इस्तेमाल किए गए पैकेट और बोतलें 10 कलेक्शन सेंटरों या उसी दुकान पर वापस करेंगे, जहां से सामग्री खरीदी थी। स्कैनिंग के बाद उन्हें पैसा वापस मिल जाएगा। इस व्यवस्था से यात्रा मार्ग पर गंदगी फैलने की समस्या काफी हद तक खत्म होगी।

90 हजार श्रद्धालुओं के स्नान की उम्मीद

छोटा शाही स्नान का मुहूर्त शुक्रवार रात 11:50 बजे से शुरू होकर शनिवार शाम 9:38 बजे तक चलेगा। भरमौर प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि इस दौरान करीब 80 से 90 हजार श्रद्धालु डल झील में पवित्र डुबकी लगाएंगे। पंजाब, हरियाणा, कश्मीर, चंडीगढ़, दिल्ली, गुजरात और मध्यप्रदेश से भी भक्त बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं।

 

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यात्रा के लिए फिटनेस टेस्ट अनिवार्य

समुद्र तल से 13,385 फीट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश यात्रा आसान नहीं है। यहां ऑक्सीजन की कमी रहती है। इसी कारण से यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल फिटनेस टेस्ट अनिवार्य किया गया है। जो लोग टेस्ट में पास नहीं होंगे, उन्हें यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। प्रशासन का कहना है कि पहले भी ऑक्सीजन की कमी से कई श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतज़ाम

ADM भरमौर कुलविंदर सिंह राणा ने अपील की है कि सभी श्रद्धालु प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और गंदगी न फैलाएं। इस बार 100 अतिरिक्त शौचालय बनाए गए हैं। साथ ही, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 500 पुलिस जवान और NDRF-SDRF की टीमें तैनात की गई हैं।

 

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हेलिकॉप्टर, घोड़े और कुल्ली से भी यात्रा संभव

मणिमहेश यात्रा को श्रद्धालु पैदल, घोड़े, कुल्ली या हेलिकॉप्टर से पूरा कर सकते हैं। भरमौर से गौरीकुंड तक हेलिकॉप्टर का किराया 3340 रुपए और होली से गौरीकुंड तक 4999 रुपए तय किया गया है। घोड़े और कुल्ली का किराया लोकेशन के हिसाब से 200 से 1450 रुपए के बीच है। इस बार पहली बार हेलिकॉप्टर की ऑनलाइन बुकिंग भी उपलब्ध करवाई गई है।

श्रद्धालुओं के लिए कैंप और लंगर की व्यवस्था

भरमौर, हड़सर, धनछो, सुंदरासी और गौरीकुंड में पांच बड़े कैंप बनाए गए हैं, जहां मेडिकल टीम, टेंट और भोजन के लिए लंगर की व्यवस्था है।

पौराणिक मान्यता और आस्था

मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं मणिमहेश के कैलाश शिखर पर निवास करते हैं। डल झील से कैलाश पर्वत का अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष शिव दर्शन का अनुभव कराता है। यह यात्रा 9वीं शताब्दी से चली आ रही है, जब राजा साहिल वर्मन को भगवान शिव के दर्शन हुए और उन्होंने यहां मंदिर स्थापित किया।

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