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September 25, 2025

हिमाचल के इन 100 सरकारी स्कूलों में होगी CBSE की पढ़ाई, विभाग ने जारी की लिस्ट, पूरे करने होंगे मानक

सुक्खू सरकार की नई पहल, मानक पूरे ना करने वाले स्कूलों का कटेगा नाम

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himachal Govt School

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य में स्कूली शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने प्रदेश के 100 सरकारी स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ((CBSE) से संबद्ध करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस फैसले के तहत अब इन स्कूलों में सीबीएसई का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा और शिक्षा की गुणवत्ता को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में ठोस पहल की गई है।

प्रदेशभर से 100 स्कूलों का हुआ चयन

राज्य सरकार ने पहले चरण में हर जिले से चयनित 100 सरकारी स्कूलों की सूची तैयार कर ली है जिन्हें सीबीएसई से संबद्ध किया जाएगा। इन स्कूलों का चयन बुनियादी ढांचे, संसाधनों और शैक्षणिक क्षमता के आधार पर किया गया है। शिक्षा विभाग ने इस योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ सीबीएसई को प्रस्ताव भेजे गए हैं।

 

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दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक

राज्य के शिक्षा विभाग की एक टीम हाल ही में दिल्ली जाकर सीबीएसई अधिकारियों से मुलाकात कर चुकी है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के विशेष भूगोल और संसाधनों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सीबीएसई से नियमों में कुछ राहत देने की मांग की है, ताकि अधिक से अधिक स्कूल इस योजना के तहत आ सकें।

 

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अब सीबीएसई की एक टीम हिमाचल के इन स्कूलों का भौतिक निरीक्षण करेगी। जो स्कूल मानकों पर खरे उतरेंगे, उन्हें ही औपचारिक रूप से मान्यता प्रदान की जाएगी। सीबीएसई ने संबद्धता के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोल दिया है और राज्य सरकार ने संबद्धता प्रक्रिया का कार्य भी आरंभ कर दिया है।

सीएम सुक्खू की 15 अगस्त पर की गई थी घोषणा

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 15 अगस्त को प्रदेश के 200 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने की घोषणा की थी। पहले चरण में 100 स्कूलों को चयनित किया गया है और यदि इनमें से कोई स्कूल मानकों पर खरा नहीं उतरता तो उसकी जगह अन्य उपयुक्त स्कूल को जोड़ा जाएगा।

 

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बनेगा अलग कैडर, शिक्षकों को मिलेगा विकल्प

इन सीबीएसई स्कूलों के लिए राज्य सरकार एक अलग सब-कैडर बनाएगी। मौजूदा शिक्षकों को इसमें शामिल होने का विकल्प दिया जाएगा। स्कूलों में कार्यरत प्रधानाचार्य, शिक्षक और गैर-शिक्षण स्टाफ का चयन योग्यता, शैक्षणिक प्रदर्शन, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भागीदारी और अन्य प्रासंगिक मानकों के आधार पर किया जाएगा।

किन जिलों के कौन-कौन से स्कूल होंगे शामिल

  • शिमला: नेरवा, स्वरस्वती नगर, जुब्बल, गुम्मा, बल्दयां, कोटी, रामपुर, रोहडू, पोर्टमोर, छोटा शिमला, लालपानी, सुन्नी, घणाहट्टी व ठियोग स्कूल
  • सिरमौर: नाहन, राजगढ़, पौंटा साहिब, नाैराधार, शिलाई, कफोटा, सतौन स्कूल
  • सोलन: अर्की, कुनिहार, दाड़लाघाट, बद्दी, नालागढ़, धर्मपुर, सोलन, कंडाघाट, ममलीग स्कूल
  • मंडी: भंगरोटू, मारही, पनारसा, जोगेंद्रनगर, करसोग, गोहर, मंडी, सरकाघाट, जंजैहली, सुंदरनगर स्कूल
  • बिलासपुर: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिलासपुर, घुमारवीं, हटवार, भराड़ी, तलाई और जुखाला
  • ऊना: अंब, अंबोटा, हरोली, बदेहरा, दुलेहड़, बंगाणा, ऊना
  • चंबा: किलाड़, चवाड़ी, सिंहुता, चंबा, तीसा व किहार स्कूल
  • हमीरपुर: सोहरी, भोरंज, खरवाड़, शहीद कैप्टन मृदुल शर्मा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हमीरपुर, नादौन, गलोड़, बाड़ा, धनेटा, अमलेहर, सुजानपुर व करोट
  • कांगड़ा: कुनसाल, देहरा, ढलियारा, धर्मशाला, फतेहपुर, इंदौरा, जयसिंहपुर, अप्पर लंबा गांव, सलेटी, ज्वालामुखी, ज्वाली, नगरोटा सूरयां, न्यू कांगड़ा, नगरोटा बगवां, नूरपुर, पालमपुर, कनबारी, शाहपुर, भरवाणा
  • किन्नौर: रिकांगपिओ, भाबानगर, सांगला व कनम स्कूल
  • कुल्लू: आनी, बंजार, मनाली, कुल्लू और सराहन
  • लाहुल-स्पीति: केलांग, काजा

डे-बोर्डिंग मॉडल पर भी होगा काम

ये सीबीएसई स्कूल भविष्य में डे-बोर्डिंग संस्थानों के रूप में विकसित किए जाएंगे, जहां छात्रों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ पोषण, खेलकूद, कला, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और कोचिंग की भी सुविधाएं मिलेंगी।

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क्या होंगे इसके फायदे?

राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा: सीबीएसई पाठ्यक्रम होने से विद्यार्थियों को जेईई, नीट, एनडीए जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़त मिलेगी।

बेहतर प्रतिस्पर्धा: राज्य बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से शिक्षा का स्तर सुधरेगा।

प्रेरणा और अवसर: शिक्षक और छात्र दोनों को प्रदर्शन सुधारने के लिए बेहतर अवसर और संसाधन मिलेंगे।

उच्च शिक्षा में लाभ: छात्रों को देशभर में मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम के चलते उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश आसान होगा।

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हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार का यह कदम राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह योजना न सिर्फ छात्रों को बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर करेगी, बल्कि सरकारी स्कूलों की छवि को भी मजबूत बनाएगी।

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