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August 3, 2025
हिमाचल में होता है कई वैरायटी का सेब, जानें किसमें है सबसे अधिक मिठास
सिर्फ लाल ही नहीं होता सेब
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शिमला। हिमाचल प्रदेश देश-विदेश में सेब के लिए जाना जाता है। प्रदेश की इकोनॉमी में लगभग 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का हिस्सा सिर्फ सेब से आता है। इसमें भी शिमला जिले का बड़ा योगदान है लेकिन क्या आप जानते हैं हिमाचल में कितने प्रकार के सेब होते हैं ? आइए जानते हैं।
ये हिमाचल का ब्रैंड सेब है। इसे हिमाचल में सबसे ज्यादा बोया जाता है। ये 8000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर उगता है। इसकी उम्र 80-100 सालों तक की होती है। इसकी खास बात ये है कि इसकी शेल्फ लाइफ ज्यादा है, ये 6 महीनों तक कोल्ड स्टोरेज में फ्रैश रहता है। इसका रंग चमकीला गहरा लाल होता है।
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सेब की इस वैरायटी को हिमाचल के निचले इलाकों में 4000–5500 फीट की ऊंचाई पर उगाया जाने लगा है। ये सेब जल्दी पकता है और शुरुआती सीजन में ही मार्केट में आ जाता है। अर्ली मार्केट में इसे ऊंचे दाम मिलते हैं। ये दिखने में पीले-लाल पैच वाला होता है। इसकी शेल्फ लाइफ सिर्फ 5-10 दिन की होती है।
सेब की इस वैरायटी का स्वाद विदेशी है। भारत में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। ये वैरायटी एप्पल रेड डिलीशियस और रॉल्स जेनेट का क्रॉस है। इसका मूल रूप जापान का है। अब इसकी खेती भारत में भी हो रही है। ये दिखने में गुलाबी-लाल स्ट्राइप के साथ पीले-हरे शेड का होता है। फूजी डेसर्ट और डायरेक्ट फ्रेश ईटिंग के लिए बेस्ट होता है।
ये सेब की वो वैरायटी है जिसका रंग ब्राइट ग्रीन है। धीरे-धीरे ये इंडिया में पॉप्यूलर हो रहा है। खास बात ये है कि सेब की ये वैरायटी मीठी नहीं, खट्टी होती है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है और ये डाइजेशन में मदद करता है। इसे जूस, सलाद और डाइटिंग के लिए बढ़िया माना गया है जिससे ये हेल्थ कॉन्शियस लोगों की डिमांड में रहता है।
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सेब की इस वैरायटी का रंग लाल नारंगी और बेस हल्का हरा होता है। इसे क्रंचीनेस का किंग कहा जाता है। इसका गूदा कोमल लेकिन क्रिस्प होता है। इसे डायरेक्ट ईटिंग के लिए उपयुक्त माना गया है। देखने में सुंदर और खाने में स्वादिष्ट होने के चलते इसका दाम बाजार में ज्यादा रहता है।
इस वैरायटी का सेब मध्यम आकार का पीला सेब है। ये मिड हाइट बेल्ट में उगता है। इसकी शेल्फ लाइफ 3 महीने की होती है। ये हल्का मीठा और गूदेदार होता है। इसका इस्तेमाल खाने और प्रोसेसिंग के लिए होता है।
सेब की ये वैरायटीज सीजन की शुरुआत की पहचान होती हैं। ये अर्ली मैच्योरिंग किस्में हैं जो जून-जुलाई में ही मंडियों में पहुंच जाती हैं। ये दिखने में हल्के लाल स्ट्राइप के होते हैं। इनकी शेल्फ लाइफ 5-7 दिन की ही होती है।
सेब की ये किस्में मिड सीजन की हैं। ये हाई यील्ड और डेकोरेटिव सेब हैं। इनकी पहचान वाइड स्ट्राइप्स से होती है और ये डेकोरेटिव लुक देते हैं। इसकी मांग होटेल और उपहार बाजारों में ज्यादा होती है।
सेब की ये वैरायटीज भारतीय हाइब्रिड्स हैं। चौबटिया अनुपम की खास बात है कि ये दिखने में आकर्षक होती है। ये स्वाद में मीठी होती है। इसमें रोग कम लगता है और उत्पादन जल्दी होता है। इसकी बेहतर कीमत मिलती है। वहीं लाल अंबरी रेड डिलीशियस और अम्बरी का संकर है। इसकी चमकदार स्किन और लंबी शेल्फ लाइफ इसे बाजार में टिकाऊ बनाता है।
ये भी हाइब्रिड सेब की किस्म है। इसे रेड डिलीशियस और मैकिन्टोश सेब को मिलाकर बनाया गया है। ऐसा अमेरिका के न्यूयॉर्क में साल 1945 में किया गया था। ऐसा कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के जिनेवा रिसर्च सेंटर ने तैयार किया था। इसका रंग चमकदार लाल होता है। अगर 6 महीने तक इसे स्टोर कर फ्रिज में रखा जाए तो ये 6 महीने तक फ्रैश रह सकता है। ये फंगल बीमारियों से प्रतिरोधक है।