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January 4, 2026
हिमाचल में फिर बदलेगा मौसम- विभाग ने जताए बर्फबारी के आसार, घने कोहरे का अलर्ट जारी
4 से 6 जनवरी तक घने कोहरे की चेतावनी
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शिमला। नए साल की शुरुआत के साथ ही हिमाचल प्रदेश में मौसम फिलहाल राहत भरा बना हुआ है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। पिछले दिनों ऊंचे इलाकों में हुई हल्की बारिश-बर्फबारी ने किसानों-बागवानों को थोड़ी उम्मीद जरूर दी है, मगर 3 महीने से पड़े सूखे के लिए वो पर्याप्त नहीं।
हालांकि, 6 जनवरी को पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है, लेकिन इसका असर व्यापक नहीं होगा।
मौसम विज्ञान केंद्र भारत मौसम विज्ञान विभाग, शिमला के अनुसार निचले, मध्य और अधिकांश ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में फिलहाल बारिश या भारी बर्फबारी के कोई संकेत नहीं हैं। इससे प्रदेश में जनजीवन सामान्य रहने की उम्मीद है।
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मौसम विभाग ने 4 से 6 जनवरी तक निचले पहाड़ी और मैदानी जिलों के लिए घने कोहरे को लेकर चेतावनी जारी की है। ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन और सिरमौर जिलों में सुबह और रात के समय दृश्यता काफी कम रह सकती है। कई इलाकों में ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बनने की भी आशंका जताई गई है, जिससे ठंड का असर अधिक महसूस हो सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। इसके बाद न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, अधिकतम तापमान में भी अगले 3 से 4 दिनों में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं।
हाल के तापमान रिकॉर्ड की बात करें तो लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान माइनस 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जबकि कुल्लू जिले के बजौरा में अधिकतम तापमान 22.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।
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मौसम विभाग का कहना है कि इस अवधि के दौरान प्रदेश में भारी बारिश, व्यापक बर्फबारी या आंधी-तूफान की कोई संभावना नहीं है। केवल 6 जनवरी को ऊंचाई वाले कुछ क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी या बारिश हो सकती है, जिसका प्रभाव सीमित दायरे में ही रहेगा।
घने कोहरे को देखते हुए वाहन चालकों को सुबह और शाम के समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। वहीं, बुजुर्गों और बच्चों को ठंड से बचाव के उपाय अपनाने को कहा गया है। किसानों और बागवानों को पाले की आशंका को ध्यान में रखते हुए फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी गई है।