#अपराध
January 3, 2026
धर्मशाला कॉलेज छात्रा मामले में आरोपी प्रोफेसर सस्पेंड, अब तक नहीं हुई एक भी गिरफ्तारी
मामले की कई स्तरों पर हो रही जांच, सुक्खू सरकार ने भी लिया एक्शन
शेयर करें:

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला की छात्रा पल्लवी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों से जुड़े इस संवेदनशील प्रकरण में सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी प्रोफेसर अशोक कुमार को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ ही पूरे मामले की जांच अब कई स्तरों पर तेज हो गई है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने भूगोल के प्रोफेसर अशोक कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय शिक्षा निदेशालय, शिमला तय किया गया है। सरकार का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आरोपी प्रोफेसर को किसी भी शैक्षणिक गतिविधि से दूर रखा जाएगा।
यह भी पढ़ें : हिमाचल के सैंकड़ों कर्मचारियों को नए साल का तोहफा, मिलेगा 50 फीसदी एरियर
इससे पहले मामले में जिला अदालत ने प्रोफेसर अशोक कुमार को 12 जनवरी तक अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेगा और किसी भी तरह से जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा। जमानत मिलने के बावजूद मामला लगातार गंभीर बना हुआ है।
वहीं इस मामले में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि घटना दुखद और चिंताजनक है। मामले की गहराई से जांच के लिए सरकार ने एडिशनल डायरेक्टर शिक्षा हरीश शर्मा की अध्यक्षता में एक हाई.लेवल कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी तीन दिन में मामले की जांच कर रिपोर्ट शिक्षा सचिव को सौंपेगी। जांच कमेटी में तीन प्रिंसिपल को शामिल किया गया है, जिनमें एक महिला प्रिंसिपल भी सदस्य हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रोफेसर अशोक कुमार पर लगे आरोपों की भी इसी कमेटी द्वारा विस्तृत जांच की जाएगी
छात्रा की मौत के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रशासन को फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही कमेटी कॉलेज में मौजूद एंटी-रैगिंग तंत्र और शिकायत निवारण प्रणाली की भी विस्तृत समीक्षा करेगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
यह भी पढ़ें : महिलाओं के लिए खुशखबरी: सुक्खू सरकार खाते में डालेगी 1500-1500 रुपए, 8 लाख ने किया है आवेदन
छात्रा के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर अशोक कुमार समेत कुल चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसमें तीन छात्राओं पर रैगिंग करने के आरोप हैं, जबकि प्रोफेसर पर यौन और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, एफआईआर दर्ज हुए 36 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, जिसको लेकर परिजनों और छात्र संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इस मामले को प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी कहा था कि मामला बेहद गंभीर है। सीएम सुक्खू ने कहा था कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोष को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। वहीं प्रोफेसर को सस्पेंड करने के निर्देश जारी किए थे।
उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
मामले में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और मानसिक प्रताड़ना के आरोप सामने आने के बाद हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग ने भी हस्तक्षेप किया है। आयोग ने पुलिस से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
इसके अलावा राज्य महिला आयोग ने भी इस प्रकरण का संज्ञान लिया है। महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि छात्राओं की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक को गंभीरता से लिया जाएगा।
फिलहाल यह मामला प्रशासन, सरकार और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं की संयुक्त निगरानी में है। छात्रा की मौत को लेकर प्रदेश भर में आक्रोश का माहौल है और लोग निष्पक्ष जांच व दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।