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January 3, 2026
CM सुक्खू की दो टूक: लैंड रेवेन्यू हिमाचल का अधिकार, सालाना 2 हजार करोड़ की होगी कमाई
जलविद्युत परियोजना डवेलपर्स के साथ सीएम सुक्खू ने की बैठक
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शिमला। हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सुक्खू सरकार ने सख्त और निर्णायक कदम उठा रही है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रदेश आर्थिक रूप से कमजोर है। ऐसे में अब सुक्खू सरकार ने प्राकृतिक संसाधनों से ही धन उगाही करने की शुरूआत की है। जिससे प्रदेश को अच्छी खासी आय होने की उम्मीद है। दरअसल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य में स्थापित जलविद्युत परियोजनाओं पर दो प्रतिशत भू.राजस्व ;लैंड रेवेन्यूद्ध लागू किया गया है। इस फैसले से प्रदेश को हर साल करीब 1800 से 2000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में जलविद्युत परियोजना डवेलपर्स के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार हिमाचल का है। उन्होंने कहा कि नदियों में बहता पानी प्रदेश की अमूल्य धरोहर है और इन संसाधनों के उपयोग से लाभ कमाने वाली कंपनियों का यह दायित्व बनता है कि वे राज्य को नियमानुसार भू.राजस्व अदा करें।
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मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि भू-राजस्व वसूलना राज्य का वैधानिक अधिकार है और प्रदेश में कार्यरत सभी जलविद्युत परियोजनाओं को यह देना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि सरकार भू-राजस्व की दरों के युक्तिकरण (Rationalisation) पर डवेलपर्स के साथ विचार-विमर्श के लिए तैयार है, ताकि किसी पर अनावश्यक बोझ न पड़े और राज्य के हित भी सुरक्षित रहें।
सीएम सुक्खू ने जानकारी दी कि 25 मेगावाट क्षमता तक की जलविद्युत परियोजनाओं के डवेलपर्स के साथ 12 जनवरी को शिमला में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में विशेष बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें भू-राजस्व के विशेष मूल्यांकन और व्यावहारिक समाधान पर चर्चा होगी।
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प्रदेश में वर्तमान में 188 जलविद्युत परियोजनाएं क्रियाशील हैं, जिनसे यह नया भू-राजस्व वसूला जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास योजनाओं के लिए स्थायी संसाधन भी उपलब्ध होंगे।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बैठक में यह भी बताया कि सरकार ने भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से जुड़े हिमाचल के अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को बीबीएमबी परियोजनाओं में स्थायी सदस्यता के साथ-साथ वर्ष 1966 से 2011 तक के लगभग 6500 करोड़ रुपये के एरियर की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हिमाचल को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। प्रदेश के संसाधनों का सदुपयोग जनहित और विकास के लिए किया जाएगा। साथ ही, डवेलपर्स की वास्तविक समस्याओं का समाधान भी संवाद के माध्यम से किया जाएगा। कुल मिलाकर, सुक्खू सरकार का यह फैसला हिमाचल के आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में राज्य की वित्तीय सेहत और विकास की रफ्तार दोनों को मजबूती मिलेगी।