#अपराध
February 9, 2025
हिमाचल की एक ही पंचायत में डबल घोटाला : आरोपी हुए मालामाल- करोड़ों का खेल
घोटालों को लेकर सुर्खियां बटौर रही पंचायत
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की एक ही पंचायत से दो बड़े घोटाले सामने हैं। तीसा की सनवाल पंचायत इन दिनों घोटालों को लेकर काफी सुर्खियों में आ रही है। इन घोटालों में आरोपियों द्वारा करोड़ों रुपए का घोटला किया गया है।
दरअसल, यह पंचायत सेब घोटाले और सीमेंट घोटाले के लेकर चर्चाओं में बनी हुई है। तीसा की इस पंचायत में वर्तमान प्रधान पर घोटाले को लेकर प्रशासन की गाज गिर चुकी है। पंचायत प्रधान पर सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप है।
आपको बता दें कि जिले के चर्चित सेब घोटाले में नए-नए खुलासे सामने आ रहे है। घोटाले के आरोपी कुछ प्रतिनिधियों के ड्राइवर सहित रिश्तेदार मालामाल हुए हैं। इस दौरान उनके खातों में लाखों का लेनदेन हुआ है। यह लेनदेन पंचायत वैंडर के खाते से हुआ है। जिसके बाद अब घोटाले को लेकर प्रतिनिधियों पर जांच की आंच आ सकती है। लाखों के इस लेनदेन के बाद पुलिस कई लोगों को जांच के लपेटे में ले सकती है।
बताया जा रहा है कि घोटाले ले बाद अब तक वैंडर के खाते से रिश्तेदारों के खाते में लाखों का लेनदेन हुआ है- जो अब तक करोड़ों में पहुंच गया है। इस दौरान एक आरोपी के ड्राइवर और मां के खाते में लाखों रुपये खाते से भेजे गए है। ऐसे में सवाल खड़े हो गए है कि इतनी बड़ी राशि समय समय पर वैंडर ने प्रतिनिधियों ले रिश्तेदारों के खाते में क्यों डाली।
गौरतलब है कि चंबा जिला के तीसा में सेब खरीद घोटाला पूरे प्रदेशभर में सुर्खियों में है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सेब खरीद घोटाले में शामिल आरोपियों पर मामला तीसा थाना में दर्ज किया गया। जिसके बाद आरोपियों ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने आरोपियों को अग्रिम जमानत दी व पुलिस को 3 मार्च को अपना पक्ष पेश करने के आदेश दिए।
वहीं पुलिस द्वारा जांच तेज कर दी गई है। जांच के दौरान पुलिस द्वारा घोटाले को लेकर साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। आरोपियों के खाते व वैंडरों के खाते की डिटेल खंगाली जा रही है। इस दौरान पुलिस ने पाया कि वैंडरों के खाते से प्रतिनिधियों के खाते में लाखों रुपये की राशि स्थान्तरित की गई है।
विदित रहे कि, तीसा की एक पंचायत में 8 पौधारोपण कार्य पंचायत द्वारा करवाए गए थे। इस दौरान पंचायत ने एक ही वैंडर से 48500 सेब के पौधे खरीदे थे। मगर जांच व रिकॉर्ड के मुताबिक नर्सरी वैंडर के पास 22,000 के करीब पौधे उपलब्ध थे। यही नहीं मार्च 2023 में जांच के दौरान गणना में 19300 के करीब पौधे ही मौके पर पाए गए थे। ऐसे में हजारों सेब के पौधे मौके पर पाए ही नहीं गए थे। जिसको लेकर वर्तमान प्रधान पर प्रशासन ने कार्रवाई भी की थी।
इसके साथ नर्सरी वैंडर के खाते में लगभग 88 लाख रूपये इन सेब के पौधों के सरकारी खाते से आये। जबकि, मौजूदा पंचायत उपप्रधान के खाते में वैंडर के खाते से चेक के माध्यम से लाखों का लेनदेन हुआ है। 48500 सेब के पौधों की खरीद के 50 बिलों में उपप्रधान के भी हस्ताक्षर है। इसके साथ पूर्व जिला परिषद के परिवार को 1 करोड़ के लगभग धन राशि चैकों के माध्यम से दी है और इस सेब घोटाले में 82 हजार रूपये के करीब सेब ढूलाई का किराया वसूल किया गया है। बता दें कि इस पंचायत में सेब के बगीचों में 8 विभिन्न कार्यों में 1 करोड़ 17 लाख 16 हाजार 32 रूपये स्वीकृत हुए थे।
वर्तमान पंचायत प्रधान जिसे गतवर्ष उपायुक्त चंबा द्वारा सेब घोटाले को लेकर निष्कासित भी किया है। वर्तमान प्रधान के खातों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। उनके खातों में कोई लेनदेन नहीं हुआ है। साथ ही प्रधान पर 64 लाख सरकार के रूपयों का दुरुपयोग करने का आरोप है।
वहीं, इसी पंचायत से अब संबंधित सीमेंट कहीं और उतारने को लेकर पंचायत फिर से सुर्खियों में आ गई है। जानकारी के अनुसार, बीते दिनों तीसा पुलिस ने तीसा में एक गाड़ी को सरकारी सीमेंट उतारते हुए पकड़ा था। पुलिस टीम को गाड़ी चालक मौसमदीन निवासी गांव गुवाड़ी, चुराह पूछताछ के दौरान संतोषजनक दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। जबकि, इस दौरान चालक ने मौके पर अलग-अलग दस्तावेज पुलिस को दिखाए। जिसके आधार पर फिर पुलिस ने सीमेंट की गाड़ी कब्जे में ले ली।
बताया जा रहा है कि सनवाल पंचायत के इस सरकारी सीमेंट को बेचने की फिराक में थे। सरकारी सीमेंट से लदी गाड़ी स्टोर से चंबा की तरफ जा रही है। जबकि, यह गाड़ी स्टोर से सनवाल की तरफ जानी चाहिए थी। इस मामले में जब सिविल सप्लाई के अधिकारियों से पूछताछ की तो उनके द्वारा इस बारे सही जवाब नहीं दिया जा रहा हैं। वहीं, पुलिस ने छानबीन करने के बाद मंगलवार देर शाम सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर पुलिस द्वारा दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।
सीमेंट के गड़बड़झाले के बाद के कई सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन की कारगुजारी भी सामने आई। क्योंकि जो गाड़ी उस दिन लोड हुई उसके बिल उसके पकड़े जाने के बाद जारी हुए। हालांकि, कॉर्पोरेशन के अधिकारी सफाई दी रहे है कि उनका सॉफ्टवेयर काम नहीं कर रहा था।
वहीं, ट्रक में एक तारा निवासी गांव सरेला, चुराह मौजूद था। इस दौरान जब पुलिस ने उसे दस्तावेज पेश करने को कहा तो उसने बताया कि यह सीमेंट ठेकेदार का है। इस दौरान उसने ठेकेदार के नाम का अपने फोन में परमिट दिखाया। यह परमिट दो साल पुराना था-जिस कारण पुलिस को इनकी कार्यप्रणाली पर संदेह हुआ।
जानकारी के अनुसार, सीमेंट के गड़बड़झाले में जो गाड़ी इस्तेमाल की गई वह वैंडर की है ही नहीं। सीमेंट ढुलान के लिए जो वैंडर अधिकृत है उनकी गाड़ी न होना संदेह के घेरे में है। ढुलान की अदायगी वेंडरों को ही की जाती है। कयास लगाए जा रहे है कि जो वैंडरों के द्वारा प्रतिनिधियों के खाते में राशि समय पर भेजी जाती है- वह इन्हीं कामों की डाली जाती है। बताया जा रहा है कि पंचायत प्रधान मोहन लाल, गाड़ी मालिक केवल कृष्ण ने सरकारी सीमेंट को आनामोड़ से लोड कर 3 किलोमीटर चंबा की तरफ सीमेंट अनलोड करवाया जा रहा था।
उधर, मामले की पुष्टि करते हुए SP अभिषेक यादव ने बताया कि पुलिस द्वारा जो सीमेंट की गाड़ी पकड़ी थी उसका जांच के बाद मामला दर्ज लिया गया है। सरकारी सीमेंट को बेचने की मंशा से अनलोड करने पर दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच की जा रही है।