#अव्यवस्था
March 20, 2026
हिमाचल में गैस सिलेंडर का संकट : कई ढाबे-होटल हुए बंद, लोगों को नहीं मिल रहा खाना
दस से सिलेंडर की रिफिलिंग बंद, रोजी-रोटी पर पड़ रहा असर
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सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) इन दिनों एक बड़े संकट से जूझ रहा है। 11 मार्च से कमर्शियल LPG सिलेंडरों की रिफिलिंग पर लगी रोक ने यहां के उद्योगों, ढाबों, होटलों और कैंटीनों की रफ्तार लगभग थाम दी है।
हजारों मजदूरों और कारोबारियों की रोजी-रोटी पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। दरअसल, BBN क्षेत्र में करीब 4,000 से 5,000 छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हैं। इनमें बड़ी संख्या उन इकाइयों की है, जहां कर्मचारियों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था कैंटीनों और ठेकेदारों के जरिए की जाती है।
सिलेंडर की सप्लाई ठप होने से यह पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। बताया जा रहा है कि 30 प्रतिशत से ज्यादा ढाबे और छोटे होटल पूरी तरह बंद हो चुके हैं, जबकि बाकी जगहों पर काम सीमित स्तर पर चल रहा है।

फैक्टरियों में काम करने वाले हजारों मजदूरों के सामने अब भोजन का संकट खड़ा हो गया है। कैंटीनों में खाना बनना बंद होने से कई जगह मजदूरों को बाहर से महंगा खाना खरीदना पड़ रहा है या फिर खुद ही जुगाड़ करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई लोग लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर हैं।
पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। लकड़ी के सहारे खाना बनाने की कोशिश भी अब नाकाम हो रही है, क्योंकि गीली लकड़ी जल नहीं पा रही। ऐसे में न तो ढाबों में खाना बन पा रहा है और न ही कैंटीनों में। इसका सीधा असर मजदूरों की सेहत और कामकाज पर पड़ रहा है।
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कैंटीन ठेकेदार जनक राज ने बताया कि 11 मार्च के बाद से एक भी कमर्शियल सिलेंडर एजेंसी से नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि उनके जैसे ठेकेदारों को हर महीने 100 से ज्यादा सिलेंडरों की जरूरत होती है, लेकिन सप्लाई पूरी तरह बंद है।
ऐसे में अब उनके सामने कैंटीन बंद करने की नौबत आ गई है। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो हजारों मजदूरों की नौकरी पर संकट आ सकता है और फैक्ट्रियों का उत्पादन भी प्रभावित होगा।

स्थानीय निवासी डीडी राणा ने कहा कि कमर्शियल सिलेंडर की कमी ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र को प्रभावित कर दिया है। उन्होंने बताया कि देशभर में किसी बड़े कारण से यह संकट पैदा हुआ हो सकता है, लेकिन बीबीएन जैसे औद्योगिक हब में इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। यहां हजारों परिवारों की आजीविका उद्योगों और उनसे जुड़े कारोबार पर निर्भर है।
वहीं, संजीव कुमार का कहना है कि खाने-पीने से जुड़े करीब 75 प्रतिशत कारोबार बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि सिलेंडर की कमी और लगातार बारिश ने हालात को बेहद खराब कर दिया है। मजदूरों को समय पर भोजन नहीं मिल पा रहा और ठेकेदारों को अपने कारोबार के बंद होने की चिंता सता रही है।

प्रभावित लोगों ने CM सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि कमर्शियल LPG सिलेंडरों की आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए- ताकि उद्योगों की रफ्तार फिर से पटरी पर लौट सके और मजदूरों को राहत मिल सके।
BBN जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। फिलहाल, सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो यह संकट और गहरा सकता है।