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March 20, 2026

हिमाचल में एंबुलेंस बनी डिलीवरी रूम : अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में महिला ने जन्मी बेटी

अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ गई महिला की हालत

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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आज एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। बंजार उपमंडल के गांव पलाच की एक गर्भवती महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही 108 एंबुलेंस में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है।

एंबुलेंस में बच्चे का जन्म

एंबुलेंस स्टाफ ने समय पर निर्णय, सही प्रशिक्षण और सूझबूझ के चलते न सिर्फ सुरक्षित प्रसव करवाया, बल्कि जच्चा-बच्चा दोनों की जान भी सुरक्षित रखी। फिलहाल, दोनों जच्चा-बच्चा को अस्पताल में दाखिल किया गया है और दोनों स्वस्थ हैं।

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महिला को हुई तेज प्रसव पीड़ा

जानकारी के अनुसार, घटना बुधवार रात की है। गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर बंजार अस्पताल से 108 एंबुलेंस के माध्यम से क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू ले जाया जा रहा था। मगर रास्ते में महिला को बहुत तेज प्रसव पीड़ा होने लगी।

अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत

अभी अस्पताल पहुंचने में समय था और लारजी क्षेत्र के पास महिला की हालत बिगड़ गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए एंबुलेंस पायलट निक राम और EMT दीने राम ने बिना समय गंवाए एंबुलेंस को सुरक्षित स्थान पर रोका और मौके पर ही प्रसव करवाने का फैसला लिया।

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एंबुलेंस बनी डिलीवरी रूम

सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद दोनों कर्मचारियों ने अपने मेडिकल प्रशिक्षण और अनुभव का उपयोग करते हुए एंबुलेंस के अंदर ही सुरक्षित डिलीवरी करवाई।

 

Ambulance Delivery Room

एंबुलेंस में गूंजी किलकारी

कुछ ही देर में एंबुलेंस में नवजात की किलकारी गूंज उठी। महिला ने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया, जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली। प्रसव के तुरंत बाद EMT द्वारा मां और नवजात को आवश्यक प्राथमिक उपचार दिया गया। साथ ही उनकी स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरती गईं।

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दोनों जच्चा-बच्चा सुरक्षित

इसके बाद जच्चा और बच्चा दोनों को सुरक्षित क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचाया गया। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों द्वारा की गई जांच में पुष्टि हुई कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की हालत स्थिर है और कुछ समय तक निगरानी के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

108 सेवा बनी मातृत्व की रक्षक

इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि 108 एम्बुलेंस सेवा केवल आपातकालीन सहायता नहीं, बल्कि मां और नवजात के लिए जीवन की डोर बन चुकी है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद 108 स्टाफ की प्रशिक्षण, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सराहनीय है।

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