शिमला। हिमाचल प्रदेश में महंगाई भत्ते (डीए) और उसके लंबित एरियर को लेकर कर्मचारियों की मांगों के बीच प्रदेश हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार को अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत के इस आदेश के बाद राज्य सरकार के सामने कर्मचारियों के डीए से जुड़े मामलों पर समयबद्ध निर्णय लेने की चुनौती बढ़ गई है। हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित सक्षम प्राधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कर्मचारियों की पांच लंबित डीए किस्तों और एरियर के भुगतान से जुड़े प्रतिवेदनों पर छह सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार फैसला लें। यदि जांच में कर्मचारियों का दावा सही पाया जाता है और राशि देय बनती है, तो उसका भुगतान भी इसी समयसीमा में करना होगा।

कर्मचारियों के बकाया डीए पर हाईकोर्ट का दखल

न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने यह आदेश उन कर्मचारियों की अलग-अलग रिट याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया, जिन्होंने लंबे समय से डीए एरियर का भुगतान न होने का मुद्दा उठाया था। याचिकाकर्ताओं में सुनीता देवी, पूजा रानी गौतम, हिमांशु शर्मा, संजीव कुमार और कांता देवी सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना था कि सरकार के समक्ष कई बार अपनी मांग रखे जाने के बावजूद उनके लंबित प्रतिवेदनों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

 

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छह सप्ताह में फैसला लेना होगा, भुगतान पर भी समयसीमा

हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित प्राधिकारियों को स्पष्ट किया है कि वे याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदनों पर छह सप्ताह के भीतर विचार कर नियमानुसार अंतिम निर्णय लें। अदालत ने यह भी कहा कि यदि जांच और विचार के बाद डीए की पांचों लंबित किस्तों तथा एरियर की राशि कर्मचारियों को देय पाई जाती है, तो उसका भुगतान भी निर्धारित छह सप्ताह की अवधि के भीतर सुनिश्चित किया जाए। संबंधित प्राधिकारी को अपने फैसले की जानकारी याचिकाकर्ताओं को तुरंत देनी होगी।

 

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2022 से एरियर नहीं मिलने का कर्मचारियों ने उठाया मुद्दा

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि राज्य सरकार के 2 मार्च 2024, 16 अक्तूबर 2024 और 15 अक्तूबर 2025 को जारी कार्यालय ज्ञापनों के तहत उन्हें 1 जुलाई 2022 से महंगाई भत्ते का एरियर मिलना था। इसके बावजूद यह राशि अब तक जारी नहीं की गई। कर्मचारियों ने दावा किया कि डीए की देय किस्तों और एरियर का भुगतान लंबित रहने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दूसरे वर्ग के कर्मचारियों को लाभ मिलने का भी दिया हवाला

याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलीलों में 10 अक्तूबर 2024 और 3 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचनाओं का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि राज्य के एक अन्य विशिष्ट वर्ग के कर्मचारियों को केंद्रीय दरों के आधार पर महंगाई भत्ते का लाभ दिया गया, जबकि उन्हें समान लाभ नहीं मिला। कर्मचारियों ने इस अंतर को भी अपनी याचिकाओं का आधार बनाया और कहा कि उन्होंने संबंधित सक्षम प्राधिकारियों के सामने पहले ही प्रतिवेदन देकर राहत मांगी थी, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

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हाईकोर्ट ने गुण-दोष पर फैसला दिए बिना याचिकाएं निपटाईं

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर याचिकाओं के मूल विवाद और दावों के गुण-दोष पर विस्तृत फैसला नहीं सुना रही है। इसके बजाय सभी याचिकाओं का निपटारा करते हुए सक्षम प्राधिकारियों को कर्मचारियों के प्रतिवेदनों पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है। यानी कर्मचारियों को डीए और एरियर का भुगतान स्वतः मंजूर नहीं हुआ है, बल्कि सरकार को पहले उनके दावों की जांच कर तय करना होगा कि वे भुगतान के पात्र हैं या नहीं।

 

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सरकार के सामने अब समयसीमा में निर्णय लेने की चुनौती

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार को कर्मचारियों के लंबित डीए और एरियर के मामलों पर तय समय में कार्रवाई करनी होगी। यदि कर्मचारियों के दावे नियमानुसार सही पाए जाते हैं, तो सरकार को छह सप्ताह के भीतर भुगतान भी करना होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में डीए की पांच लंबित किस्तों और एरियर को लेकर सरकार का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। कर्मचारियों की नजरें अब इस बात पर टिकी होंगी कि सरकार उनके दावों पर क्या निर्णय लेती है और बकाया भुगतान को लेकर क्या कदम उठाती है।

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