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October 26, 2026

हिमाचल में महंगा हुआ दूध.. CM सुक्खू ने की बड़ी घोषणा, दूग्ध उत्पादकों को दिया तोहफा; जानें नए रेट

सीएम सुक्खू ने 10 रुपए बढ़ाए दूध के दाम, अब 61 रुपए प्रति लीटर मिलेगा भाव

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CM Sukhu milk price

कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में किसानों और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर बड़ा दांव खेला है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और दूध बेचकर परिवार चलाने वाले पशुपालकों को आर्थिक राहत पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने दूध की खरीद कीमत में सीधे 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। अब 11 दिसंबर से दुग्ध उत्पादकों को दूध के लिए 61 रुपये प्रति लीटर मिलेंगे। यानी यह बढ़ोतरी महज दो या पांच रुपये की नहीं, बल्कि सीधे 10 रुपये की है, जिससे प्रदेश के हजारों पशुपालकों की आमदनी को सहारा मिलने की उम्मीद है।

 

कुल्लू जिले के बजौरा में सोमवार को आयोजित जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह घोषणा की। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से किसानों और पशुपालकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना सरकार के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा है। दूध की खरीद कीमत बढ़ाने का फैसला भी इसी नीति का हिस्सा बताया जा रहा है। 

 

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32 रुपये से 61 रुपये तक पहुंचा दूध का मूल्य

मुख्यमंत्री ने दूध के दाम में बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए पिछली सरकार और मौजूदा सरकार के कार्यकाल की कीमतों की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के समय दुग्ध उत्पादकों को दूध के लिए 32 रुपये प्रति लीटर मिलते थे। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस खरीद मूल्य को बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर किया और अब इसे 61 रुपये प्रति लीटर करने का फैसला लिया गया है।

 

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इस तरह सरकार के घोषित फैसलों के अनुसार दूध की खरीद कीमत में पहले के मुकाबले कुल 29 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी होगी। पशुपालकों के लिए यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य खर्चों के बीच दूध की बेहतर कीमत उनकी कमाई पर सीधा असर डालती है।

कच्ची हल्दी 150 रुपये  किलो खरीदेगी सरकार

मुख्यमंत्री सुक्खू ने केवल दूध की कीमत बढ़ाने तक ही अपनी घोषणा सीमित नहीं रखी, बल्कि किसानों की फसलों को बेहतर दाम दिलाने से जुड़ी योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदेगी। इसके अलावा प्राकृतिक तरीके से उगाई गई मक्की के लिए 50 रुपये प्रति किलो और प्राकृतिक गेहूं के लिए 80 रुपये प्रति किलो का खरीद मूल्य तय किया गया है।

 

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इन घोषणाओं के जरिए सरकार का प्रयास किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है। खासकर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए निर्धारित खरीद दरें उन्हें परंपरागत फसलों के बजाय वैकल्पिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने में भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, किसानों को इन दरों का वास्तविक लाभ कितना और किस स्तर पर मिलेगा, यह खरीद व्यवस्था और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

गांवों में पैसा पहुंचे, तभी मजबूत होगी अर्थव्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाना और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूती देना है। उनका मानना है कि जब किसानों को फसलों का बेहतर मूल्य और पशुपालकों को दूध की अच्छी कीमत मिलेगी, तो ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। इससे स्थानीय बाजारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिल सकता है।

 

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हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में खेती और पशुपालन बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका से जुड़े हैं। ऐसे में दूध और कृषि उत्पादों की खरीद कीमत बढ़ाने के फैसले ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। सरकार इन घोषणाओं के माध्यम से किसानों और पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का संदेश देना चाहती है।

'सत्ता सुख के लिए नहीं, व्यवस्था परिवर्तन के लिए आए'

जनसभा में मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार सत्ता का सुख लेने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के उद्देश्य से सत्ता में आई है। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए दावा किया कि केंद्र सरकार के आकलन में हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देश में पांचवें स्थान पर पहुंचा है, जबकि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश 21वें स्थान पर था।

 

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मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी सरकार की ओर से किए गए प्रयासों को दिया। उनके मुताबिक, सरकार प्रदेश में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और आम लोगों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए काम कर रही है।

अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने का दावा

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया लगातार जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी न रहे और डिस्पेंसरी सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी पद खाली न रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के विकास, किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति बेहतर करने तथा आम जनता को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रयास जारी रखेगी।

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