नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, भक्ति और व्रत का बहुत महत्व है। हर व्रत की अपनी एक अलग विधि और खासियत है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है।

बन रहा है महासंयोग

इस बार प्रदोश व्रत पंचांग के अद्भुत संयोग के साथ आ रहा है। इस बार की त्रयोदशी तिथि को सिद्ध योग, साध्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, अमृत सिद्धि योग और अनुराधा नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। जिसके चलते इस व्रत का महत्व और फलदायिता अत्यधिक बढ़ जाती है।

कब है प्रदोश व्रत?

इस महीने त्रयोदशी तिथि 19 जून यानी कल पड़ रही है। जोकि बुध प्रदोष व्रत के रूप में विशेष महत्व रखती है। त्रयोदशी तिथि 19 जून, 2024 सुबह 7 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी। जबकि, त्रयोदशी तिथि 20 जून, 2024 सुबह 7 बजकर 49 मिनट पर खत्म होगी। प्रदोश व्रत की पूजा का मुहूर्त 19 जून, 2024 शाम 7 बजकर 22 मिनट से लेकर 9 बजकर 22 मिनट तक है।

कष्टों का होता है नाश

मान्यता के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत को रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही कष्टों का नाश होता है, ग्रहों को दोष दूर होते हैं और संतान प्राप्ति में भी सहायता मिलती है। यह भी पढ़ें: हिमाचल: 7 साल के बेटे को अकेला छोड़ गया पिता, दूसरे की जिंदगी कर गया रोशन

कितने रखने चाहिए यह व्रत?

कहा जाता है कि प्रदोष व्रत लगातार 11 या 26 त्रयोदशी तक रखने चाहिए। इसके बाद इसका विधि-विधान उद्यापन कर दें। उद्यापन के बाद आप चाहें तो आप फिर से प्रदोष व्रत रख सकते हैं।

जानें पूजा की विधि

प्रदोष व्रत को रखने के लिए सुबह-सवेरे सूर्योदय होने से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें। साथ ही शिवलिंग की स्थापना करके विधिवत पूजन करें और प्रदोष व्रत कथा का श्रवण करें। यह भी पढ़ें: हिमाचल की इस गुफा के अंदर है देवताओं का वास: दीवारों से टपकता था घी इसके बाद शाम के समय दीप जलाकर भगवान शिव की आरती गाएं और शिवलिंग को फल, फूल और मिठाई अर्पित करें। फिर रात भर जागकर भगवान शिव का ध्यान करें।

कैसे रखा जाता है प्रदोष व्रत?

प्रदोष व्रत दो तरीकों से रखा जाता है। प्रदोष का मतलब सूर्यास्त के आसपास के समय से होता है। आप चाहें तो आप व्रत वाले दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक यह व्रत रख सकते हैं। या फिर व्रत वाले दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक व्रत रख सकते हैं। का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करें।

व्रत में क्या खाना चाहिए?

प्रदोष व्रत में बिना कुछ खाए व्रत रखने का विधान है। ऐसा करना संभव न हो तो एक समय फल खा सकते हैं। इस उपवास में केवल सेंधा नमक खाना मान्य है और अन्य नमक का सेवन वर्जित है। यह भी पढ़ें: हिमाचल में हरियाणा के युवक की दबंगई, होटल कर्मचारी को मारा चाकू

व्रत टूटने पर क्या करें?

अगर व्रत खंडित हो जाए तो उसकी भरपाई आने वाले समय में पड़ने वाले प्रदोष व्रत को करके करना चाहिए। जिस व्यक्ति का प्रदोष व्रत टूट जाए उसे उस दोष से मुक्ति पाने के लिए उस दिन रुद्राक्ष की माला से शिव मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए। मान्यता है कि इस उपाय को करने पर व्रत टूटने का पाप नहीं लगता है।

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